आदिवासी झामसिह की मौत पर इंसाफ मांगने मुख्यालय में जुटा सर्व आदिवासी समाज

बालाघाट, सुनील कोरे| 6 सितंबर को कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में मारे गये कबिरधाम जिले के झलमला थाना अंतर्गत ग्राम बालसमुंद निवासी 50 वर्षीय झामसिंह धुर्वे की मौत के बाद सर्व आदिवासी समाज इसके न्याय के लिए एकजुट हो गया है, गढ़ी के बाद 15 सितंबर को जिला मुख्यालय मंे सर्व आदिवासी समाज के नेतृत्व में एकजुट हुए प्रदेश के बालाघाट, मंडला, सिवनी और शहपुरा के आदिवासी सगाजनों ने 6 सितंबर को कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में मारे गये आदिवासी झामसिंह धुर्वे की मौत के साथ ही नक्सली उन्मूलन की आड़ में मारे गये और फर्जी मामले में बंदी बनाये गये आदिवासियों के मामले की उच्चस्तरीय जांच करने, फर्जी नक्सली मुठभेड़ में शामिल गढ़ी थाना के नक्सली पुलिस बल एवं हॉकफोर्स के दल पर हत्या का मामला दर्ज करने, एसपी को हटाने, मृतक झामसिंह धुर्वे के दोनो पुत्रों को सरकारी नौकरी के साथ ही एक करोड़ रूपये मुआवजा देने सहित 9 सूत्रीय मांगो का ज्ञापन सौंपा गया।

इस आंदोलन में बैहर विधायक संजयसिंह उईके, निवास विधायक अशोक मर्सकोले, शहपुरा विधायक भूपेन्द्र मड़ावी, बरघाट विधायक अर्जुनसिंह काकोड़िया, अनुसूचित जनजाति आयोग सदस्य गुलाब उइके, आदिवासी नेता द्रोपकिशोर मेरावी, महिला नेत्री श्रीमती हिरासन उईके, आदिवासी विकास परिषद जिलाध्यक्ष भुवनसिंह कोर्राम, पूर्व विधायक मधु भगत, जनपद अध्यक्ष श्रीमती शीला सरोते, युवा नेता दिनेश धुर्वे, ओबीसी महासभा जिलाध्यक्ष सौरभ लोधी सहित बड़ी संख्या में आदिवासी बंधु मौजूद थे।

पुलिस सुरक्षा के बीच सर्व आदिवासी समाज ने उत्कृष्ट विद्यालय से निकाली रैली
6 सितंबर को कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में मारे गये झामसिंह धुर्वे की मौत से आक्रोशित सर्व आदिवासी समाज ने जिला मुख्यालय में अपने सशक्त नेतृत्व के साथ उत्कृष्ट विद्यालय मैदान मंे आंदोलन की हुंकार भरी, जिसके बाद आंदोलन की अगुवाही कर रहे नेताओं के साथ जिले सहित पड़ोसी जिले और छत्तीसगढ़ से पहुंचे सैकड़ो की संख्या में आदिवासियों ने पुलिस प्रशासन और एसपी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रैली निकाली। जो आंबेडकर चौक से स्टेडियम के सामने से होते हुए विश्वेश्वरैया चौक पहुंची। जहां सर्व आदिवासी समाज के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर दीपक आर्य को ज्ञापन सौंपा और 15 दिनों के भीतर मांगे पूरी नहीं होने पर जिले सहित राज्यस्तरीय आंदोलन की चेतावनी दी।

मजिस्ट्रेट जांच पर भरोसा नहीं, हाईकोर्ट के जज से करवाई जायें मामले की जांच
कथित नक्सली मुठभेड़ में मारे गये झामसिंह की मौत के बाद सर्व आदिवासी समाज द्वारा गढ़ी में की गई बड़ी बैठक के बाद जिला प्रशासन ने नक्सली मुठभेड़ में मारे गये झामसिंह की मौत की जांच के मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिये है, जिसकी जांच बैहर अपर कलेक्टर शिवगोविंद मरकाम कर रहे है, जिसको लेकर विधायक संजयसिंह उईके ने कहा कि उन्हें मजिस्ट्रेट जांच पर भरोसा नहीं है, मजिस्ट्रेट जांच के नाम पर प्रशासन मामले में लीपापोती करना चाह रहा है, जो हम होने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि फर्जी नक्सली मुठभेड़ के नाम पर मारे गये आदिवासी झामसिंह धुर्वे की मौत की जांच हाईकोर्ट के जज से कराई जायें, साथ ही नक्सली उन्मूलन के नाम पर पुलिस द्वारा पाथरी चौकी अंतर्गत घनश्याम पिता संतुसिंह बैगा और मंशाराम पिता संतुसिंह बैगा सहित उसकी 8 माह की गर्भवती सौनीबाई के खिलाफ नक्सली के नाम पर की गई कार्यवाही सहित अन्य नक्सली मामले में मारे गये और प्रताड़ित किये जा रहे आदिवासियों के मामले की उच्चस्तरीय जांच की जायें। मृतक झामसिंह के परिवार के सदस्य को नौकरी, एक करोड़ रूपये मुआवजा प्रदान किया जायें। साथ ही इस मामले में बालाघाट एसपी को तत्काल हटाकर झामसिंह की हत्या करने वाले गढ़ी नक्सली पुलिस बल और हॉकफोर्स के दल पर हत्या का अपराधिक मामला दर्ज किया जायें। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि बालाघाट पुलिस द्वारा फर्जी नक्सली मुठभेड़ के नाम पर मारे गये आदिवासी झामसिंह धुर्वे की गोली मारकर हत्या छत्तीसगढ़ सीमा के भोरटेकरा जंगल में की गई और उसे छिपाने के लिए उसके शव को गढ़ी थाना अंतर्गत बसपहरा के जंगल तक लाया गया।

टारगेट को पूरा करने आदिवासियों को बनाया जा रहा निशाना, अब जाग गया आदिवासी समाज
कथित नक्सली मुठभेड़ में मारे गये आदिवासी झामसिंह धुर्वे की मौत पर उसके लिए इंसाफ मांगने बालाघाट में जुटे सर्व आदिवासी समाज के आंदोलन में शामिल आदिवासी जनप्रतिनिधि विधायक निवास विधायक अशोक मर्सकोले, शहपुरा विधायक भूपेन्द्र मड़ावी और बरघाट विधायक अर्जुनसिंह काकोड़िया ने भी आदिवासी अंचलो में नक्सली उन्मूलन के नाम से सरकार के संरक्षण में प्रशासन द्वारा आदिवासी को मारने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पदोन्नति, टारगेट को पूरा करने और फंड को लेकर पुलिस प्रशासन जिले में नक्सली की मौजूदगी होने की बात करता है, जबकि यदि वास्तविक में नक्सली है तो बताये कि अभी तक नक्सलियों ने किस बड़ी वारदात को अंजाम दिया है, उन्होंने कहा कि बालाघाट जिले के अलावा मंडला में भी नक्सली के नाम पर आदिवासियों को प्रताड़ित करने का काम किया जा रहा है। इसी तरह मोतीनाला में भी आदिवासियों को नक्सली के नाम पर परेशान किया जा रहा है, पूरे प्रदेश में जल, जंगल, जमीन के काम करने वाले आदिवासियों को एक षडयंत्र के तहत उनके संवैधानिक अधिकारों को छिनने का प्रयास किया रहा है, लेकिन अब आदिवासी समाज जाग उठा है और आदिवासियों को प्रताड़ित और उन्हें आपस में लड़ाने वाली सोच के खिलाफ वह उठ खड़ा होकर आवाज बुलंद करने लगा है।

मांगो के निराकरण के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम
सर्व आदिवासी समाज ने कथित नक्सली मुठभेड़ में मारे गये आदिवासी झामसिंह मौत मामले की उच्चस्तरीय जांच, परिवार को मुआवजा एवं नौकरी, एसपी को हटाने तथा झामसिंह की मौत के जिम्मेदार गढ़ी का नक्सली पुलिस बल और हॉकफोर्स के जवानों पर कार्यवाही सहित अन्य 9 सूत्रीय मांगो के निराकरण के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है, जिसके बाद मांगो के निराकरण नहीं होने पर सर्व आदिवासी समाज द्वारा जिले सहित पूरे राज्य में आदिवासी आंदोलन छेड़े जाने की चेतावनी दी है।

भारी संख्या में मौजूद रहा पुलिस बल
15 सितंबर को सर्व आदिवासी समाज के आंदोलन को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा बालाघाट और किरनापुर एसडीएम सहित भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया था। जगह-जगह बेरिकेटिंग कर रास्ते को रोक दिया गया था। विश्वेश्वरैया चौक भी प्रदर्शनकारी सर्व आदिवासी समाज के लोगों को कलेक्ट्रेट कार्यालय के घेराव से रोकने के लिए तीन लेयर की बेरिकेटिंग की गई थी। साथ ही पुलिस अधिकारी सीएसपी के नेतृत्व में कई थानो के थाना प्रभारी और पुलिस बल मौजूद था।

जांच में जो भी दोषी पाया जायेगा उसके विरूद्ध होगी कार्यवाही-कलेक्टर
बालाघाट जिले के गढ़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत बसपहरा के जंगल में 06 सितम्बर को झामसिंह धुर्वे नामक ग्रामीण की मृत्यु की जांच के संबंध में आदिवासी समाज द्वारा कलेक्टर को ज्ञापन सौपा गया है। कलेक्टर श्री दीपक आर्य ने इस दौरान आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी मांगों को सुना और बताया कि बसपहरा में मृत झामसिंह धुर्वे की मृत्यु की दंडाधिकारी जांच के आदेश कर दिये गये हैं और अपर कलेक्टर बैहर शिवगोविंद मरकाम को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। आदिवासी समाज द्वारा जो भी मांगे ज्ञापन के माध्यम से सामने रखी गई हैं, उन्हें कार्यवाही के लिए शासन को भेजा जा रहा है। इस घटना की जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जायेगा, उसके विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी।

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