Balaghat : हत्या के आरोप में पिता को आजीवन कारावास, पुत्र दोषमुक्त

पिता मनोहर लिल्हारे को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा मिली है। वहीं पुत्र अरूण लिल्हारे को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया है।

बालाघाट, सुनील कोरे। बालाघाट (Balaghat) में न्यायालय के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमरनाथ केशरवानी की अदालत ने 30 जून को हत्या मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए फैसला दिया। जिसमें आरोपी मनोहर लिल्हारे को आजीवन कारावास (life imprisonment) एवं 10 हजार रूपये जुर्माने की सजा से दंडित किया है। जबकि दूसरे आरोपी मनोहर के पुत्र अरूण लिल्हारे को साक्ष्य के आभाव में दोषमुक्त कर दिया है। मामले में अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक अधि. मदनमोहन द्धिवेदी ने पैरवी की थी।

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अधिवक्ता मदन मोहन द्धिवेदी ने बताया कि आरक्षी केन्द्र नवेगांव ग्रामीण थाना अंतर्गत ग्राम गोंगलई में 7 सितंबर 2019 की रात्रि लगभग 8.30 बजे पुरानी रंजिश को लेकर राधेलाल लिल्हारे के साथ लात, घुसो और मोटर सायकिल के टायर से उमाशंकर लिल्हारे, मनोहर लिल्हारे और अरूण लिल्हारे ने मारपीट की थी। जिसमें गंभीर रूप से घायल राधेलाल लिल्हारे को परिजनो ने उपचारार्थ अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में ग्रामीण थाना पुलिस ने जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान भर्ती राधेलाल के कथनों के आधार पर आरोपी उमाशंकर लिल्हारे, मनोहर लिल्हारे और अरूण लिल्हारे के खिलाफ धारा 302, 34 के तहत अपराध कायम कर विवेचना के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया था। जिन्हें न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायालय से न्यायिक रिमांड पर जेल भिजवा दिया था। मामले में संपूर्ण विवेचना उपरांत ग्रामीण थाना पुलिस ने अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया। जिसकी सुनवाई न्यायालय में चल रही थी। 30 जुलाई को मामले की अंतिम सुनवाई के बाद माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मृतक राधेलाल लिल्हारे के मृत्यु पूर्व दिये गये बयानों के आधार पर आरोपी मनोहर लिल्हारे को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 10 हजार रूपये के अर्थदंड के दंड से दंडित करने का फैसला दिया है। जबकि आरोपी अरूण लिल्हारे को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया है।

जेल में रहते एक आरोपी की हो चुकी है मृत्यु
राधेलाल लिल्हारे की मारपीट कर हत्या करने के मामले में आरोपी बनाये गये उमाशंकर लिल्हारे की फैसला आने से पूर्व जेल में रहते हुए मौत हो गई है। जिससे हत्या के इस मामले में केवल पिता, पुत्र ही आरोपी बचे थे। जिसमें पिता मनोहर लिल्हारे को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा मिली है। वहीं पुत्र अरूण लिल्हारे को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया है।

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