नक्सली मुठभेड़ पर कांग्रेस विधायक और पूर्व सांसद ने उठाये सवाल, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

बालाघाट, सुनील कोरे| 6 सितंबर को गढ़ी थाना अंतर्गत उमरझोला ईलाज कराने पहुंचे दो नक्सलियों की सूचना के बाद गढ़ी पुलिस और हॉकफोर्स की टीम के साथ बसपहरा के जंगल में नक्सलियों से हुई मुठभेड़ पर अब सवाल खड़े होने लगे है। पूर्व सांसद कंकर मुंजारे, बैहर विधायक संजय सिंह उईके, आदिवासी विकास परिषद जिलाध्यक्ष भुवनसिंह कोर्राम ने इसे फर्जी नक्सली मुठभेड़ करार देते हुए नक्सली के नाम पर आदिवासी की हत्या किये जाने के मामले में हत्या की धारा के तहत अपराध दर्ज करने की मांग की है। जबकि पूर्व सांसद कंकर मुंजारे और आदिवासी विकास परिषद जिलाध्यक्ष भुवनसिंह कोर्राम ने मामले की सीबीआई जांच किये जाने की मांग की है और मांग पूरी नहीं होने और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

मामले को लेकर उठते सवालों के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के लिए मजिस्ट्रिटेट जांच के आदेश दिये है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री दीपक आर्य ने गत दिवस बैहर तहसील के गढ़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत नक्सली मुठभेड़ में मारे गए व्यक्ति की मौत की दंडाधिकारी जांच के आदेश दिये है। दंडाधिकारी जांच के लिए अपर कलेक्टर बैहर शिवगोविंद मरकाम को नियुक्त किया गया है।

गौरतलब हो कि 6 सितंबर को पुलिस को सूचना मिली थी कि गढ़ी के उमरझोला ग्राम में दो नक्सली ईलाज कराने आये है। जिसके बाद पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी के मार्गदर्शन में गढ़ी पुलिस और हॉकफोर्स की दो टीमों नक्सलियों की तलाश के लिए रवाना की गई थी। जिसमें एक टीम उमरझोला गांव में नक्सलियों की तलाश कर रही थी, जबकि दूसरी टीम नेशनल फारेस्ट क्षेत्र में सर्चिंग कर रही थी। पुलिस की मानें तो बसपहरा के जंगल में पहाड़ी पर नक्सलियों के दिखाई देने और नक्सलियों द्वारा सुरक्षाबलों पर फायरिंग किये जाने के जवाब में सुरक्षाबलों द्वारा भी फायरिंग की गई। जिसके दूसरे दिन मुठभेड़ वाले स्थल पर पुलिस को एक 45 वर्षीय व्यक्ति का अज्ञात शव मिला था। जिसके कुछ दूरी पर ुलिस के अनुसार पिट्टु बैग में कुछ दैनोपयोगी सामग्री और एक भरमार बंदूक मिली थी। जिससे पुलिस को आशंका थी कि मारा गया व्यक्ति को नक्सलियों का सहयोगी या संगम सदस्य है, जिसके तीसरे दिन 7 सितंबर को मारे गये व्यक्ति की पहचान कवर्धा जिले के झलमला थाना अंतर्गत बालसमुंद निवासी 50 वर्षीय झामसिंह धुर्वे के रूप में की गई।

पुलिस द्वारा बताये गये नक्सली मुठभेड़ में मारे गये बालसमुंद निवासी झामसिंह धुर्वे की मौत के बाद जिस तरह से उसके परिजन, ग्रामीण और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि के बयान सामने आ रहे है। उससे पुलिस ओर नक्सलियों के बीच की मुठभेड़ पूरी तरह से फर्जी प्रतित हो रही है। हालांकि पुलिस अब भी मुठभेड़ की बात को स्वीकार कर मारे गये व्यक्ति की जांच की बात कर रही है। जबकि परिजन, ग्रामीण और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियो ने मीडिया के सामने चीख-चीखकर कहा है कि पुलिस द्वारा बताई गई नक्सली मुठभेड़ फर्जी है, अपनी पीठ थपथपाने के लिए पुलिस ने नक्सली मुठभेड़ की फर्जी कहानी बताकर एक बेकसूर को मार दिया है।

झामसिंह के साथ घटना दिनांक को बालसमुंद गांव से कुछ दूरी पर मछली मारने गये नैनसिंह की मानें तो शाम होने के वक्त जब वह लौट रहे थे, इस दौरान ही चितकबरे पहने कुछ लोगों ने उन्हें रोका, जिन्हें देखकर वह भागने लगे तो चितकबरे पहने लोगों ने उन पर दो गोली चलाई, जिसमें एक गोली झामसिंह के पीट के पीछे से सीने को चिरते हुए निकल गई। जिससे वह वहीं गिर गया। जबकि दूसरी गोली उसके कान के पास से गुजरी, जिससे घबराकर भागते हुए वह घर गांव में अपने घर पहुंचा। जिसके बाद मानसिंह के परिजनों को उसने घटना की सूचना दी। जब वह दूसरे दिन घटनास्थल पहुंचे तो उसका शव वहां नहीं पड़ा था। जिससे जनप्रतिनिधियों द्वारा लगाये जा रहे उस आरोप को बल मिलता है, जिसमें जनप्रतिनिधियों का कहना है कि बालाघाट पुलिस ने छत्तीसगढ़ सीमा में घुसकर नक्सली के नाम से एक बेकसूर को गोली मार दी और उसके शव को एक किलोमीटर दूर तक खिंचकर गढ़ी थाना क्षेत्र लेकर आये। ताकि बालाघाट पुलिस बता सकें कि नक्सली मुठभेड़ जिले की सीमा में हुई थी। वहीं कवर्धा के पुलिस अधिकारियों के बयान और बालाघाट पुलिस के बयान में भी विरोधाभाष दिखाई दे रहा है। जबकि अमूमन नक्सली सीमाक्षेत्र में होने से अक्सर पुलिस ज्वाईंट ऑपरेशन चलाती है। बताया जाता है कि मारे गये आदिवासी झामसिंह धुर्वे के परिजन ओर ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ पुलिस को मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आवेदन भी सौंपा है।

पूर्व सांसद और आदिवासी विकास परिषद ने सीबीआई जांच की मांग
पुलिस की नक्सली मुठभेड़ में मारे गये छत्तीसगढ़ के बालसमुंद निवासी झामसिंह धुर्वे की मौत पर आरोपों का दौर जारी है और मामले में झामसिंह की मौत की जांच को लेकर राजनीतिक दलों और आदिवासी संगठनो ने आवाज बुलंद कर दी है। पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने इस मामले में निज निवास पर आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि नक्सली मुठभेड़ के नाम से पुलिस की गोली से मारे गये आदिवासी झामसिंह धुर्वे की मौत की जांच सीबीआई से कराई जायें। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाने के लिए एक बेकसूर आदिवासी को नक्सली मुठभेड़ के नाम से मार दिया। जिस मामले में
आदिवासी विकास परिषद जिलाध्यक्ष भुवनसिंह कोर्राम ने भी मामले की सीबीआई जांच किये जाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि नक्सली उन्मूलन के नाम से पुलिस द्वारा बेकसूर आदिवासियों को मारा और प्रताड़ित किया जा रहा है। यदि मामले की सही जांच नहीं की जाती है तो सामाजिक रूप से इसका प्रतिकार आंदोलन के रूप में किया जायेगा। उन्होंने कहा कि बालसमुंद निवासी झामसिंह धुर्वे अपने साथी के साथ मछली मारने गया था। जिनके वापस लौटने के दौरान उन पर गोली चलाई गई। जिसमें झामसिंह धुर्वे की मौत हो गई। जिसको लेकर सामाजिक रूप से खासा आक्रोश है।

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