MP Transfer : नई तबादला नीति का उल्लंघन, कर्मचारी के इन ट्रांसफर पर हाई कोर्ट का स्टे

इस मामले में राज्य शासन ने हिदायत दी थी कि अगर किसी भी मामले में Transfer पॉलिसी का उल्लंघन होता है तो इसके लिए हेड ऑफ डिपार्टमेंट ऑफिसर को जिम्मेदार माना जाएगा।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (MP) में 1 से 31 अगस्त तक ट्रांसफर (transfer) पर से Ban हटाया गया था। इस दौरान कई अधिकारी कर्मचारियों को नवीन स्थानांतरण (new transfer)  देकर इधर से उधर किया गया था। हालांकि नए ट्रांसफर पॉलिसी (new transfer policy) के मुताबिक ट्रांसफर करने की हिदायत राज्य सरकार ने सभी विभागों को दी थी। बावजूद इसके कई तरह के ट्रांसफर आर्डर पर बवाल की स्थिति मच गई है। जिसके बाद ट्रांसफर को लेकर अधिकतर मामले जबलपुर हाईकोर्ट (jabalpur high court) पहुंच रहे हैं।

दरअसल मध्यप्रदेश के जबलपुर हाई कोर्ट द्वारा कई ट्रांसफर पर स्टे आर्डर (stay order) देने के बाद अब एक और मामला सामने आया है। दरअसल मामला बालाघाट जिले का है। दरअसल ईश्वरी प्रसाद चौहान, वनपाल की सेवानिवृत्ति को मात्र 5 महीने रह गए हैं। बावजूद इसके रेंज सहायक कटंगी, रेंज कटंगी साउथ सामान्य वन मंडल से उनका ट्रांसफर उत्तर सामान्य वन मंडल कर दिया गया था। 27 अगस्त को हुए इस तबादले पर ईश्वरी प्रसाद चौहान द्वारा ट्रांसफर को लेकर हाईकोर्ट जबलपुर के समक्ष चुनौती पेश की गई थी।

मामले में ईश्वरी प्रसाद चौहान का कहना था कि मध्यप्रदेश शासन की ट्रांसफर नीति द्वारा 1 वर्षीय उससे कम जिन कर्मचारियों की सेवा शेष रह गई है। उनके ट्रांसफर पर प्रतिबंध लगाया गया था। बावजूद इसके ईश्वरी प्रसाद चौहान का तबादला किया गया है।

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ईश्वरी प्रसाद चौहान के मामले में उनके वकील अमित चतुर्वेदी ने कोर्ट में पैरवी करते हुए कहा था कि कर्मचारी की सेवानिवृत्ति में मात्र 5 महीने का समय शेष रह गया है अब ऐसे में उनके तबादले से उनके परिजन प्रकरण में समस्या उत्पन्न हो सकती है इसके अलावा यह तबादला नहीं ट्रांसफर पॉलिसी का उल्लंघन करता है। जिसके बाद कोर्ट ने इस तबादले पर स्टे आदेश जारी करते हुए विभाग से जल्द से जल्द इस समस्या के निराकरण के आदेश जारी किए हैं।

बता दे कि New Transfer Policy के मुताबिक राज्य शासन ने सभी विभागों के प्रमुख सचिव को पाबंद किया था कि किसी भी ट्रांसफर आर्डर को जारी करने से पहले ट्रांसफर पॉलिसी के सारे प्रतिबंधों को देख लिया जाए। बावजूद इसके ट्रांसफर पॉलिसी का उल्लंघन किया जा रहा है। इस मामले में राज्य शासन ने हिदायत दी थी कि अगर किसी भी मामले में ट्रांसफर पॉलिसी का उल्लंघन होता है तो इसके लिए हेड ऑफ डिपार्टमेंट ऑफिसर को जिम्मेदार माना जाएगा।