पुलिस और हॉकफोर्स के जवानों ने जंगल से किया नक्सली डंप बरामद..

बालाघाट, सुनील कोरे। नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले में नक्सली डंप मिलना कोई नई बात नहीं है लेकिन काफी समय बाद नक्सली डंप मिलने से एक बार फिर जिले की सीमावर्ती जंगलो में नक्सली की मौजूदगी की आहट सुनाई देने लगी है। विगत लंबे समय से शांत पड़ी नक्सली गतिविधियां एक बार फिर नजर आने लगी है। बालाघाट जिला नक्सलियों की आरामगाह है, जहां अक्सर नक्सली अन्य क्षेत्रो में दबाव बढ़ने के बाद जिले के जंगलो में शरण लेते है, हालांकि जिले में पुलिस की सक्रियता के चलते नक्सली किसी बड़ी वारदात को अंजाम नहीं दे सके है। बीते दिनों बांस की दर को लेकर जरूर नक्सली पर्चे मिले थे। जिसके बाद अब नक्सली डंप मिलने ने पुलिस को और चौकन्ना कर दिया है।

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मिली जानकारी अनुसार पुलिस और हॉकफोर्स के जवानों को जंगलो की सर्चिंग के दौरान केराडीह एवं टांडा नदी के बीच जंगल में जमीन में गड़ाकर रखा गया नक्सली डंप मिला है, जिसे सुरक्षाबलों के जवान ने पूरी सुरक्षा के साथ बाहर निकालकर उसे बरामद किया है। बताया जाता है कि सर्चिंग टीम को एक प्लास्टिक कंटेनर मिला। जिसके अंदर कम्युनिकेशन सेट जिस पर बीएपीएफइएनजी लिखा बरामद किया है। इसके अलावा बैटरी, एक डिब्बे में करीब 750 ग्राम भरा पोटाश, 750 ग्राम एक्सप्लोसिव पाउडर सहित विस्फोट में इस्तेमाल की जानी वाली सामग्री मिली है। संभवतः इसे सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने की मंशा से नक्सलियों ने गाड़कर रखा था। जिसे पुलिस जवानों की सतर्कता ने नक्सलियों के मंसूबों में पानी फेर दिया है।

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वहीं इस मामले में लांजी थाना में मलाजखंड एवं दर्रेकसा दलम के 18 नक्सली सदस्यों के खिलाफ पुलिस पार्टी पर हमला करने नियत से विस्फोटक सामग्री छिपाकर नुकसान पहुंचाने के मामले में मिलिंद तेलतुमड़े, दर्रेकसा दलम कमांडर देवचंद्र उर्फ नरेश उर्फ चंदू, विकास नागपुरे, प्रेम उर्फ उमराव, गनपत मड़ावी, रीता, उमेश, संतु उर्फ तीजू, नागेश उर्फ राजू तुलावी, संगीता उर्फ कविता, वश्वा, रामसिंह, जानकी, सुभाष, रमेश, रानो, दामा, रनिता एवं अन्य नक्सलियों के खिलाफ केस दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया है।