ओबीसी आरक्षण और शिक्षक भर्ती में रोक के खिलाफ हुआ विरोध प्रदर्शन, प्रदर्शनकारियों ने कराया मुंडन

बालाघाट/ सुनील कोरे

प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया था। लेकिन माननीय हाईकोर्ट में गये ओबीसी आरक्षण वृद्धि के मामले में सरकार के चले जाने के बाद सत्ता में आई प्रदेश सरकार, अब तक इस मामले में चुप्पी साधे रहे है, जिसका सीधा असर ओबीसी आरक्षण कोटे से नौकरी की मंशा पाले युवाओं पर हो रहा है।

दूसरी ओर सरकार ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की सुचारू चल रही दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को रोककर, शिक्षक भर्ती की आस पाले चयनित शिक्षकों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिया है। जिससे न केवल प्रदेश का ओबीसी वर्ग अपितु शिक्षक पात्रता परीक्षा में चयनित अभ्यार्थी स्वयं को ठगा और आहत महसुस कर रहे है। जिसको लेकर आज ओबीसी महासभा जिलाध्यक्ष सौरभ लोधी के नेतृत्व में ओबीसी महासभा से जुड़े युवाओं और शिक्षक पात्रता परीक्षा में चयनित अभ्यार्थियों ने प्रदेश की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर मुंडन कराया।

प्रदेश सरकार से ओबीसी और शिक्षक पात्रता परीक्षा में चयनित अभ्यार्थियों की मांग है कि आगामी समय में तत्कालीन प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण को प्रदेश में बढ़ाकर 27 प्रतिशत किये जाने पर महत्वपूर्ण सुनवाई कोर्ट में होना है, जिस पर सरकार ओबीसी वर्ग को लेकर अपना पक्ष मजबूती से रखे और शिक्षक पात्रता परीक्षा में चयनित अभ्यार्थियों के दस्तावेज सत्यापन प्रकिया को तत्काल प्रभाव से प्रारंभ करवाये।

खास बात यह रही कि आंदोलन के दौरान कोविड-19 से बचाव को लेकर न केवल प्रदर्शनकारी मॉस्क लगाये रहे अपितु सभी ने सोशल डिस्टेंस का पालन भी किया।

ओबीसी आरक्षण और शिक्षक पात्रता परीक्षा में चयनित अभ्यार्थियों के दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को प्रारंभ करने की मांग को लेकर ओबीसी महासभा के नेतृत्व में आज 28 जुलाई को जिला मुख्यालय के आम्बेडकर चौक में ओबीसी युवाओं और चयनित शिक्षकों ने आंदोलन किया।

यहां प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा ओबीसी के बढ़ाये गये आरक्षण को लेकर दिखाई दे रही निष्क्रियता और चयनित शिक्षकों के दस्तावेज सत्यापन को प्रारंभ करने की मांग को लेकर किये गये विरोध प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने विरोध स्वरूप मुंडन कराया गया। इस दौरान सभी प्रदर्शनकारी काला मॉस्क एवं काली पट्टी बांधे हुए थे।

विरोध प्रदर्शन के दौरान आंबेडकर चौक पर विरोध स्वरूप नितेश साहू, सुरेश लोधी और सुनील बिहोने ने मुंडन कराया। इस दौरान नितेश साहु ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा नौकरी के लिए भर्ती नहीं निकाले जाने से प्रदेश के ऐसे अनेक युवा, जो नौकरी के लाखों रूपये खर्च कर तैयारी कर रहे है वह अवसाद और मानसिक तनाव का शिकार हो रहे है। जिसके कारण कई युवाओं ने आत्मघाती भी कदम उठाया है, हमारी सरकार से मांग है कि तीन सालों से रूकी नौकरी भर्ती को निकाला जायें और 2019 में सिविल सेवा की परीक्षा का परिणा जारी किया जायें। इसके साथ ही तत्कालीन प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी वर्ग को दिये गये 27 प्रतिशत आरक्षण को यथावत रखा जायें और इसको लेकर सरकार कोर्ट मे मजबूती से अपना पक्ष रखे तथा शिक्षक पात्रता परीक्षा में चयनित अभ्यार्थियों के दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से लागु किया जायें।

मुंडन कराने वाले दूसरे युवा सुरेश लोधी ने कहा कि आज भी एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग, प्रदेश में पिछड़ो में गिने जाते है, तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देकर, ओबीसी वर्ग को राहत दी थी लेकिन हाईकोर्ट में इसके खिलाफ याचिका लगाकर सरकार के ओबीसी हितैषी फैसले को रोकने का काम किया जा रहा है, हमारी सरकार से मांग है कि ओबीसी के तत्कालीन प्रदेश सरकार द्वारा बढ़ाये गये प्रतिशत को यथावत रखने, प्रदेश की भाजपा सरकार पूरी ताकत के साथ इसको लेकर माननीय न्यायालय में अपना पक्ष रखे।

इसके अलावा आंदोलन में शामिल युवाओं और युवतियों ने भी अपना पक्ष रखते हुए ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत रखने और शिक्षक भर्ती में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से प्रारंभ किये जाने की बात कही।

सरकार ने मांगो पर नहीं दिया ध्यान तो होगा प्रदेश में बड़ा आंदोलन

ओबीसी आरक्षण और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को प्रारंभ कराने की प्रमुख मांग को लेकर ओबीसी महासभा के नेतृत्व में किये गये आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ओबीसी महासभा जिलाध्यक्ष सौरभ लोधी ने कहा कि कोविड-19 के कारण भले ही आज आज ओबीसी आरक्षण और शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को लेकर आंदोलनकारी सीमित रहे है लेकिन यदि सरकार ने उनकी मांगो पर ध्यान नहीं दिया तो इसको लेकर प्रदेश में सरकार के खिलाफ भविष्य में बड़ा आंदोलन किया जायेगा।

जिला अध्यक्ष लोधी ने कहा कि ओबीसी महासभा ने ओबीसी आरक्षण और शिक्षक भर्ती दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को लेकर बालाघाट से आज आंदोलन का आगाज कर दिया गया है, जिसको लेकर ओबीसी महासभा पूरे प्रदेश में एक अभियान चलाकर ओबीसी वर्ग और शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन नहीं होने से नाराज युवाओं को जोड़कर प्रदेश में बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी और संभवतः कोविड-19 बीमारी के असर कम होने के बाद बड़े स्वरूप में सरकार के खिलाफ आंदोलन करेगी।

जिलाध्यक्ष सौरभ लोधी ने कहा कि आज संविधान निर्माता डॉ. बाबा साहेब आम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर ओबीसी महासभा ने आंदोलन का शंखनाद किया है और सरकार के समक्ष 20 सूत्रीय ज्ञापन के माध्यम से मांग रखी है कि माननीय न्यायालय में लंबित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मामले में सरकार अपना पक्ष रखते हुए प्रदेश में 27 प्रतिशत आरक्षण को यथावत रखे, ताकि ओबीसी वर्ग को उसका प्रतिनिधित्व मिल सकें। यहीं नहीं बल्कि ज्ञापन के माध्यम से ओबीसी महासभा ने प्रदेश में जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी के तहत ओबीसी को 52 प्रतिशत आरक्षण देने, वर्ष 2018 में शिक्षक पात्रता परीक्षा में चयनित होने वाले अभ्यार्थियों के दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से प्रारंभ करने और नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले में कार्यरत शासकीय कर्मचारियों को नक्सल भत्ता दिये जाने सहित 20 सूत्रीय मांगो का ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया है। जिसमें प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह इन मांगो पर विचार कर इसका निराकरण करें। अन्यथा इसके खिलाफ पूरे प्रदेश में ओबीसी महासभा तीव्र आंदोलन छेड़ेगी।

इस दौरान मूल निवासी संघ से राजेश मरार, युवा नेता विशाल बिसेन, ओबीसी महासभा कार्यवाहक जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र ठाकरे, रामदास ठवकर, संतोष परिहार, सजल मस्की, हेमेन्द्र कुमार साहु, दुर्गा पगरवार, नरेन्द्र पटले, राधेश्याम पिछोड़े, टिकु मेश्राम, नवीन मंडाले, दुर्गेश ऐड़े, शारदा फुलबांधे, वैशाली भौरगढ़े, गौतम गजभिये, आशीष गढ़पाल, पवन अंगारे, तारेश वल्के, विधा बिसेन, मनोज माहुले, सुनील बिसेन, दामिनी पटले, सुनीता लांजेवार, माधुरी मेश्राम, ओमेश्वरी पिछोड़े, लखन चौधरी, सोमेश मेश्राम, प्रीति राहंगडाले, शंकर पांजरे, संतोष कृपगये, अमित फूलमारी, जीतु मसखरे, राज चौके, अंकुश चौहान, आरिफ खान, महेश बिरनवार, जयकृष्ण ढिंगरू, राजेन्द्र कटरे सहित दर्जनों युवा मौजूद थे।