बैतूल: स्वास्थ्य विभाग का निकम्मापन, 5 साल से नहीं हुआ रजिस्ट्रेशन, एम्बुलेंस बनी कबाड़, घूमती रही फाइल

एंबुलेंस (ambulance) का रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण एंबुलेंस चली नहीं और रखी रखी कबाड़ (trash) में तब्दील हो गई है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी तत्कालीन विधायक पर दोषारोपण कर रहे हैं कि उन्होंने कागज नहीं दिए थे,

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बैतूल, वाजिद खान।  बैतूल (betul) में स्वास्थ्य विभाग (health department) की घोर लापरवाही (carelessness) सामने आयी है। जहां विधायक (MLA) निधि से मरीजों की सुविधा के लिए 5 साल पहले दी गई एंबुलेंस (ambulance) का रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण एंबुलेंस चली नहीं और रखी रखी कबाड़ (trash) में तब्दील हो गई है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी तत्कालीन विधायक पर दोषारोपण कर रहे हैं कि उन्होंने कागज नहीं दिए थे, जबकि एंबुलेंस स्वास्थ्य विभाग ने खरीदी थी।

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दरअसल बैतूल में 2016 में विधायकों द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दी गई एंबुलेंस बिना पंजीयन के ही सड़कों पर दौड़ती रहीं और जब दुर्घटनाग्रस्त हुईं तो उन्हें कबाड़ में खड़ा करा दिया गया। आमला विधानसभा क्षेत्र के तत्कालीन विधायक चैतराम मानेकर द्वारा वर्ष 2016 में मरीजों की सुविधा के लिए विधायक निधि से एक एंबुलेंस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आमला को प्रदान की गई थी। इसके बाद से लगातार इस वाहन का परिवहन विभाग में पंजीयन कराए बिना ही धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा था। इस एंबुलेंस का उपयोग बोरदेही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए किया जा रहा था। जब एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हुई तो उसके बाद से उसे खड़ा करा दिया गया है।

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बताया जा रहा है कि तत्कालीन विधायक चैतराम मानेकर ने वर्ष 2016 में विधायक निधि से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बोरदेही के लिए मारूति ओमनी एंबुलेंस के लिए 3 लाख 61 हजार 355 रूपए की राशि दी थी और इसकी प्रशासकीय स्वीकृति तत्कालीन कलेक्टर शशांक मिश्र ने दी थी। यह एंबुलेंस मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बैतूल के नाम से खरीदी गई थी। एंबुलेंस की खरीदी के बाद उसका परिवहन विभाग में पंजीयन कराने की किसी अधिकारी ने जिम्मेदारी ही नहीं समझी और बिना पंजीयन के ही वह सड़क पर दौड़ती रही।

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पिछले साल लॉकडाउन के दौरान इस एंबुलेंस का उपयोग कोरोना सैंपल ले जाने के लिए किया जा रहा था इसी दौरान यह दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। एंबुलेंस का सामने का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद से ही उसे कबाड़ में खड़ा कर दिया गया है। मुलताई के तत्कालीन विधायक चंद्रशेखर देशमुख द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंबुलेंस खरीदने के लिए विधायक निधि से राशि प्रदान की थी। इसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नाम पर एंबुलेंस की खरीदी तो कर ली गई लेकिन परिवहन विभाग से पंजीयन ही नहीं कराया गया।

27 नवंबर को महाराष्ट्र के सेंदुरजना के पास एंबुलेंस की टक्कर से बाइक सवार की मौत हो गई। इस मामले में महाराष्ट्र के सेघाट थाना पुलिस ने चालक को गिरफ्तार कर एंबुलेंस को जब्त कर लिया था । बिना पंजीयन के एंबुलेंस का संचालन किए जाने के कारण पुलिस द्वारा जिम्मेदार अधिकारियों से भी जवाब तलब किए गए थे और मामला न्यायालय में पेश किया गया था । और इसके बाद से ही यह एम्बुलेंस आमला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में खड़ी है और वहां खड़े खड़े कबाड़ में तब्दील हो गई है। ऐसी घोर लापरवाही के चलते इस एम्बुलेंस का लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है और अब अधिकारी एक दूसरे पर इसका दोषारोपण करने में लगे है ।