घर में सो रही किशोरी पर खिड़की से अज्ञात ने पेट्रोल डालकर लगाई आग, जिला अस्पताल रेफर

घर में सो रही किशोरी पर खिड़की से अज्ञात ने पेट्रोल डालकर लगाई आग, जिला अस्पताल रेफर

बैतूल:- बैतूल में एक 16 साल की किशोरी पर पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जला डालने की कोशिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है।  खास बात यह है कि जिंदा जलाने की कोशिश का यह आरोप पीड़ित किशोरी की बड़ी बहन के प्रेमी पर है। जिसने परिवार से बदला लेने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया। प्रेमी युवक की प्रेमिका चार साल पहले  जलकर मर गयी थी।

बीती रात बैतूल के रानीपुर थाना इलाके के गांव कुही में आदिवासी परिवार जब गहरी नींद में था। तब किसी ने खिड़की से पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। इस आगजनी में वहां सोई 16 साल की किशोरी बुरी तरह झुलस गई जबकि उसकी बड़ी माँ इस जानलेवा हमले में बाल बाल बच गयी। 50 प्रतिशत से ज्यादा झुलसी किषोरी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उसकी हालत स्थिर है। इस मामले में आगजनी का शिकार हुई किशोरी ने बड़ा खुलासा किया है। उसने इस करतूत के लिए उसकी बड़ी बहन के प्रेमी को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की।  किषोरी की बड़ी बहन चार साल पहले जलकर मर गयी थी। किशोरी के मुताबिक उसकी माँ गुजरात मे मजदूरी करती थी। इसी दौरान उसकी बड़ी बहन का एक युवक से अफ़ेयर हो गया था। जिस पर उसकी माँ ने बहन और उसके प्रेमी को डांट फटकार लगाई थी। जिसके बाद उसकी बहन ने आग से जलकर आत्महत्या कर ली थीं। तब से उसका प्रेमी बदला लेने की धमकी देता रहता था। इस वारदात को उसी ने अंजाम दिया है। हालांकि पुलिस फिलहाल जांच की बात कर रही है।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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