बैतूल में वकील पिटाई मामले में अदालत ने मंजूर की अग्रिम जमानत याचिका

बैतूल।वाजिद खान

बैतूल में पुलिसकर्मियों द्वारा 23 मार्च 2020 को लल्ली चौक पर दाढ़ी की वजह से मुसलमान समझ कर पीटे गए वकील की शिकायत पर कार्यवाही न करते हुए पुलिस ने उल्टा वकील पर ही मामला दर्ज कर लिया गया था, जिस मामले पर अब अदालत ने वकील की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली है। पुलिस ने वकील दीपक बुंदेले के खिलाफ 353,294 और 188 के तहत मामला दर्ज किया था, जिसकी अग्रिम जमानत याचिका अधिवक्ता दर्शन बुंदेले के माध्यम से चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश राजकुमार गुप्ता के यहां पेश की गई। न्यायालय ने दीपक बुंदेले को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। उल्लेखनीय है कि 23 मार्च 2020 को दीपक के साथ हुई पुलिसकर्मियों द्वारा की गई मारपीट की घटना की शिकायत के लगभग 100 दिन बाद बैतूल पुलिस ने उन्हें धारा 294,188,और 353 आईपीसी का मामला रजिस्टर्ड कर दिया । पुलिस अधिकारी बीएस पटेल ने अपने कथन में स्वीकार किया था दीपक की दाढ़ी बड़ी होने से मुसलमान समझ कर पीटा गया और पुलिस से पहचानने में गलती हो गई। पुलिस के साम्प्रदायिकरण से आहत होकर उसे रोकने के लिए एक रिट सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता एहतेशम हाशमी के माध्यम से जबलपुर उच्च न्यायालय के समक्ष दायर की है जिसकी अगली सुनवाई 9 जुलाई को होना है।

बता दें कि बैतूल में 23 मार्च को अस्पताल जाते समय एक वकील को रोक कर पुलिस द्वारा की गई पिटाई के विरोध में मुस्लिम कोर्डिनेशन कमेटी ने मुख्यमंत्री, डीजीपी और प्रमुख सचिव को पत्र लिख कर दोषी पुलिस अधिकारियों को निलंबित करने की मांग भी की गई है। कॉर्डिनेशन कमेटी ने उक्त मामले को डीजीपी, प्रमुख सचिव और मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर आरोपी कपिल सौराष्ट्रिय और अन्य कर्मचारियों को निलंबित करने की मांग की है, जिससे कोई भी पुलिस कर्मचारी कानून की धज्जियां न उड़ा सके। पत्र में कहा गया हैं कि आरोपी कपिल सौराष्ट्रिय का बैतूल से मन्दसौर तबादला कर विभाग ने अपना पल्ला झाड़ लिया है।इस घटना से पुलिस की छवि देश भर में धूमिल हुई है और इसे साफ करने के लिए कपिल सौराष्ट्रिय को तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट में लगी याचिका- अधिवक्ता दीपक बुंदेले ने उक्त मामले पर सुनवाई के लिए रिट याचिका जबलपुर उच्च न्यायालय के समक्ष पेश की है। याचिका में पुलिस शिकायत प्राधिकरण बनाने की मांग के साथ दोषी पुलिस कर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का निवेदन किया गया है।दलील दी गई है कि पुलिस कर्मियों ने संविधान के अनुच्छेद 15 (1) का उल्लंघन करते हुए आईपीसी की धारा 323,324,341,293 और 506 के तहत अपराध किया है। याचिका में कहा गया है कि ”राज्य और देश में पुलिस की बर्बरता की घटनाएं बढ़ रही हैं और तथ्यों के साथ यह स्पष्ट है कि पुलिस बल में सांप्रदायिक तत्व मौजूद हैं। राज्य के साधन या यंत्र के रूप में पुलिस बल को संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखना चाहिए और पुलिस द्वारा धर्म के आधार पर भेदभाव करना भारत के संविधान के जनादेश के खिलाफ है।

दाढ़ी देख मारा था पुलिस ने 

पुलिस कर्मियों ने दीपक की दाढ़ी बड़ी थी और देखने में मुसलमान जैसा लग रहा था इसलिए उस पर हमला और मारपीट की थी। इस बात को स्वयं पुलिस अधिकारी बीएस पटेल ने स्वीकार किया, जिसकी रिकॉर्डिंग दीपक ने कर मीडिया को दे दी थी। इसके बाद श्री पटेल को सस्पेंड कर दिया गया।लेकिन दीपक पर हमला और मारपीट करने वाले कर्मचारियों पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। उनमें से कपिल सौराष्ट्रिय नामक के एस आई के खिलाफ दीपक ने बयान भी दर्ज किए है लेकिन उसके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।

ये है पूरा मामला

उल्लेखनीय है कि गत 23 मार्च को बैतूल निवासी एडवोकेट दीपक बुंदेले जब जांच कराने घर से अस्पताल जा रहे थे तो पुलिस कर्मियों ने उन्हें पिटाई कर दी थी। जिसके बाद उन्होंने बैतूल के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डीएस भदौरिया और डीजीपी मप्र को पत्र लिख के दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन पुलिस अधीक्षक ने उक्त मामले पर एफआईआर दर्ज करने में कोई पहल नहीं की।

जो भी मैटर था इस पर मैं पहले ही बता चुकी हूं।एसडीओपी की जांच में कई सारे तथ्य सामने आए हैं उसी अनुसार वैधानिक कार्रवाई की गई।

श्रद्धा जोशी ,एडिशनल एसपी, बैतूल

 

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