कर्ज से परेशान किसान फांसी के फंदे पर झूला,लॉकडाउन में नहीं मिल रहा था काम

बैतूल/वाजिद खान

सोसायटी के कर्ज और लॉकडाउन में बेकारी से तंग एक किसान ने बैतूल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मामला घोडाडोंगरी तहसील के बटकीडोह गांव का है जहां कर्ज से परेशान और लॉकडाउन में काम न मिलने से परेशान होकर श्रीनिवास सरकार फांसी के फंदे पर झूल गया।

बताया जा रहा है कि किसान श्रीनिवास ने अपने गांव की नदी किनारे महुआ के पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। चोपना पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर पीएम के लिए घोडाडोंगरी अस्पताल पहुंचाया। जहां से शव परीक्षण के बाद परिजनों को सौप दिया गया है। पुलिस  के मुताबिक श्रीनिवास सरकार 45 वर्ष निवासी बटकीडोह ने नदी किनारे महुआ के पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस मर्ग कायम कर मामले की जांच कर रही है। मृतक के भाई विभाग सरकार ने बताया कि श्रीनिवास सरकार ने जून 2018 में चोपना सोसाइटी से 37800 रुपये का कर्ज लिया था। 2 साल से वह फसल खराब होने के कारण कर्ज नहीं भर पा रहा था जिससे वो डिफॉल्टर हो गया था। ऐसी स्थिति में उसे सोसायटी से खाद बीज नहीं मिल पाता। खाद बीज ना मिलने के कारण वो इस साल खेती नही कर पाता। वही लॉक डाउन में भी उसे मात्र चार पांच दिन तेंदू पत्ता तोड़ने का काम मिला तो लेकिन परिवार के जीवन यापन के लिए ये काम पर्याप्त नही था जिसके चलते वह मानसिक रूप से परेशान हो गया था। मृतक श्रीनिवास के पास मात्र पांच एकड़ जमीन है जिसमें उसके दो भाइयों का परिवार और उसकी पत्नी के अलावा दो बच्चे निर्भर है।

सोमवार शाम वह नदी किनारे श्मशान घाट के पास पहुंचा और श्मशान घाट में पड़ी धोती को उठाकर नदी किनारे महुआ के पेड़ पर उस धोती से फंदा बनाकर फांसी लगा ली। रात में परिजन उसे ढूंढते हुए जब नदी के पास पहुंचे तो नदी के पास उसकी लाश लटकी हुई थी। इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कम्प मच गया। कर्ज से मौत के चलते कोऑपरेटिव बैंक से लेकर पुलिस तक के अफसर इस मामले में कुछ भी कहने से बचते रहे । हालांकि पुलिस उसकी मौत के प्रारंभिक कारणों में कर्ज से आत्महत्या करना मान रही है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक प्रबंधन ने भी उस पर बकाया कर्ज की जांच शुरू कर दी है जबकि पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। मृतक के परिजन भी उसके कर्ज से परेशान होने और लॉकडाउन में काम न मिलने से तंग होने की बात कर रहे हैं। वे किसान का कर्ज माफ करने की मांग भी कर रहे हैं।