बैतूल। ज़िले में अब तक कोरोना संक्रमित एक मरीज़ की पुष्टि हुई है और प्रशासन बीमारी को कंट्रोल करने की हर सम्भव कोशिश कर रहा है। लेकिन ये सारी कोशिश बेमानी साबित हो सकती है अगर अन्य गम्भीर बीमारियों से पीड़ित ज़रूरत मंद मरीज़ों को पर्याप्त दवा न मिले । ज़िला चिकित्सालय बैतूल में गम्भीर बीमारियों की दवाए नहीं मिल रही है और ज़रूरत मन्द मरीज़ परेशान हो रहे है। ब्लडप्रेशर और शुगर जैसी बीमारी की टेलमा और इन्सुलिन जैसी जीवन रक्षक दवा भी अस्पताल में नहीं है। ये दवा औषधि वितरण योजना के तहत निशुल्क दी जाती है।अगर ये दवा मरीज़ को न मिले तो हालात गम्भीर हो सकते है।

शुगर और बीपी पर जल्दी अटैक करता है कोरोना-
तमाम शोध और सरकार द्वारा लोगों को जागरूक करने वाली जानकारी में भी इस बात को बताया जा रहा है कि कोरोना डाइबिटीज, दिल में मरीज़ और अधिक उम्र वालों को आसानी से जकड़ सकता है। लेकिन बावजूद इसके गम्भीर बीमारियों के मरीज़ों को अस्पताल से दवाओं का न मिलना कोरोना को परास्त करने की प्रशासन की इच्छा शक्ति पर सवाल खड़े करता है। अगर शुगर,बीपी मरीज़ कोरोना का शिकार होते है तो ज़िले के हालात ख़राब हो सकते है।

कलेक्टर को लिखा पत्र, न जवाब मिला और न दवा-
दवा न मिलने पर शासन का ध्यानाकर्षण करने के लिए जिले के अधिवक्ता दीपक बुंदेले ने 12 अप्रैल को कलेक्टर को एक पत्र लिखा था, जिस की कॉपी उन्होंने मुख्यमंत्री को भी भेजी, लेकिन कोरोना की लड़ाई को जीतने का दावा करने वाले अधिकारियों का न कोई जवाब आया और न ही अस्पताल में दवा की कमियों को पूरा किया गया। दीपक ने बताया कि जीवनरक्षक दवाओं की उन्हें भी ज़रूरत होती है लेकिन जब अस्पताल में यह नहीं मिल रही तो उन्होंने इस पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया, जिस पर निराशा ही हाथ लगी। ये दवा महंगी होने की वजह से आम आदमी के पहुँच से बाहर है। सरकार और प्रशासन को कोविड पर नियंत्रण करना है तो डाइबिटीज, ब्लडप्रेशर, दिल की बीमारी के मरीज़ और अधिक उम्र वाले लोगों का ख़ास ख़याल रखना होगा।अगर अभी से बैतूल जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के हालात को प्रशासन ने गम्भीरता से नहीं लिया तो हालात ख़राब होना तय है।