बैतूल जिला अस्पताल के टेरेस पर चढ़कर कूदने की धमकी देता रहा युवक, रेस्क्यू कर उतारा गया नीचे

Shashank Baranwal
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Betul News: मध्य प्रदेश के बैतूल जिला अस्पताल से एक बड़ा मामला सामने आया है। जहां अस्पताल में बीती रात को एक मानसिक रूप से कमजोर पंजाबी युवक छज्जे पर चढ़कर हंगामा करता रहा। वह वार्ड से बाहर निकलकर अस्पताल की ऊपरी मंजिल के टेरेस पर चढ़कर नीचे कूदने की धमकी देता रहा। जिसे गुरूवार की सुबह दमकल कर्मियों और पुलिस ने बांधकर रेस्क्यू किया।

ये है पूरा मामला

मिली जानकारी के अनुसार युवक का नाम राजू है। जो कि पंजाब निवासी बताया जा रहा है। वह बुधवार देर रात बैतूल जिला अस्पताल में भर्ती हुआ था। जिला अस्पताल के पुलिस चौकी प्रभारी सुरेंद वर्मा ने बताया कि युवक बाथरूम का वेंटीलेटर तोड़कर उपरी मंजिल के छज्जे पर आकर खड़ा हो गया। यहां चढ़कर युवक कूदने की धमकी देता रहा। इस बीच उसने खिड़की तोड़ दी और वह छज्जे से कांच फेंक कर लोगों को डराता रहा। पुलिस को सूचना मिलते ही रात लगभग 12 बजे पुलिस जिला चिकित्सालय पहुंची। वहीं नगर पालिका के दमकल वाहन को भी बुलवाया गया। लेकिन वह नीचे उतरने पर राजी नहीं हुआ। युवक कभी शराब की मांग कर रहा था तो कभी लोगों पर कांच से हमला कर रहा था। पंजाबी बोलने के कारण उसकी भाषा न समझ पाने की वजह से रात में ही गुरुद्वारे से एक दुभाषिए को बुलाकर उससे चर्चा की गई। लेकिन वह नीचे नही उतरा। आखिरकार गुरूवार को सुबह दमकल कर्मियों ने सीढियां लगाकर ऊपर जाकर उसे पकड़ा और बांधकर नीचे लाया। जिला अस्पताल चौकी के प्रभारी सुरेंद्र वर्मा ने बताया की युवक पंजाब के पठान कोट का रहने वाला है। बुधवार को ट्रेन से गिरकर घायल होने पर वह खुद जिला अस्पताल में भर्ती हुआ थ। जहां उसका इलाज किया जा रहा था।

बैतूल से वाजिद खान की रिपोर्ट


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पत्रकारिता उन चुनिंदा पेशों में से है जो समाज को सार्थक रूप देने में सक्षम है। पत्रकार जितना ज्यादा अपने काम के प्रति ईमानदार होगा पत्रकारिता उतनी ही ज्यादा प्रखर और प्रभावकारी होगी। पत्रकारिता एक ऐसा क्षेत्र है जिसके जरिये हम मज़लूमों, शोषितों या वो लोग जो हाशिये पर है उनकी आवाज आसानी से उठा सकते हैं। पत्रकार समाज मे उतनी ही अहम भूमिका निभाता है जितना एक साहित्यकार, समाज विचारक। ये तीनों ही पुराने पूर्वाग्रह को तोड़ते हैं और अवचेतन समाज में चेतना जागृत करने का काम करते हैं। मशहूर शायर अकबर इलाहाबादी ने अपने इस शेर में बहुत सही तरीके से पत्रकारिता की भूमिका की बात कही है– खींचो न कमानों को न तलवार निकालो जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो मैं भी एक कलम का सिपाही हूँ और पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूँ। मुझे साहित्य में भी रुचि है । मैं एक समतामूलक समाज बनाने के लिये तत्पर हूँ।

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