बैतूल, वाजिद खान। मध्य प्रदेश (MP) के बैतूल (Betul) में बारिश को लेकर अनोखी मान्यता देखने को मिलती, जो आपने शायद कभी देखी नहीं होगी। जहां बारिश (rain) नहीं होने पर ग्रामीणों ने इंद्रदेव की मूर्ति को मिट्टी से लपेट दिया। ग्रामीणों को लगता है कि इंद्रदेव नाराज है इसलिए वे इंद्रदेव को ही सजा दे रहे है और उनकी मूर्ति को मिट्टी में लपेट देते है और जब बारिश होगी तभी मिट्टी धुलेगी। बैतूल में इस वर्षाकाल में बारिश शुरू नहीं हुई जिससे जमीन सूख गई है और उसमें दरार पड़ने लगी है। इससे हर तरफ चिंता और बेचैनी का आलम है। बारिश की बेरुखी ने खासतौर पर किसानों के माथे पर बलला दिया है। यही वजह है कि बारिश ना होने से परेशान लोग अब अपने अपने तरीको से इंद्रदेव को मनाने में लगे है।

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बैतूल के असाडी गांव में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। यहां ग्रामीण इंद्रदेव को सजा दे रहे है। आदिवासी ग्रामीणों ने इंद्र की प्रतिमा को मिट्टी लपेट दी है। अर्धनग्न होकर बच्चों से कराये गए इस टोटके से आदिवासियों को उम्मीद है कि सांस लेने में दिक्कत होने पर इंद्र पानी बरसा देंगे। आईये जानते है पानी के लिए बेजार ग्रामीण आदिवासियों का यह अजूबी रस्म आखिर है क्या।

मरता क्या नहीं करता। इस कहावत की बानगी आप बैतूल के आदिवासी गांव असाडी में देख सकते है। अपने हाथो से मिटटी लगा रहे ये नाबालिग बच्चे कोई मकान नहीं बना रहे है। बल्कि भगवान इंद्रदेव को मिटटी में लपेट रहे है। ये बारिश ना होने से परेशान लोगो ने अपने। पुरखों का यह तरीका अपनाया है।  मान्यता है की रूठे इंद्रदेव को ही मिट्टी में लपेट दिया जाये और जब उन्हें साँस लेने में दिक्कत होगी तो खुद ब खुद बारिश करेंगे जिससे उनकी मिटटी धुल जायेगी ।

MP के इस क्षेत्र में बारिश के लिए ग्रामीण वर्षों से अपना रहे यह टोटका, इंद्रदेव को देते है ऐसी सजाMP के इस क्षेत्र में बारिश के लिए ग्रामीण वर्षों से अपना रहे यह टोटका, इंद्रदेव को देते है ऐसी सजा

स्थानीय ग्रामीण बताते है की जब भी बारिश नहीं होती तो वे ऐसा ही करते है जिसके बाद बारिश हो जाती है। असाड़ी के माली सिंह उइके बताते है कि पानी नहीं गिरने से फसले सूख जायेगी तो उनके परिवार का पेट कैसे भरेगा और पानी के बिना कैसे रहेंगे। इसलिए इंद्रदेव को सजा के तौर पर वे पुरखो के बताए यही टोटके को अपना रहे है। यह किया है उनकी मान्यता के अनुसार कुंआरे और नाबालिग बच्चे मिट्टी लाते और भगवान को लपेट देते है । इसके बाद कुछ ही दिनों में बारिश हो जाती है ।

दरअसल बैतूल आदिवासी बाहुल्य जिला है और यहां के लोग कृषि पर आश्रित है और यही कारण है कि बारिश समय पर नहीं होने से लोगो को फसले सूखने का डर सताने लगता है। जब बारिश नहीं होती है तो आदिवासियों के साथ आम लोग भी इस तरह की मान्यता में साथ देते है। बैतूल के असाड़ी गांव में प्रसिद्ध बड़देव मंदिर में आदिवासियों ने भगवान को मिट्टी में लपेट दिया है। स्थानीय कमल शुक्ला का कहना है कि बड़देव नाम से प्रसिद्ध इस स्थान पर आसपास के कई जिलों के आदिवासी आते है और बारिश के लिए प्रार्थना करते है। आपको बतादें कि ग्रामीण जिस स्थान पर यह अनुष्ठान कर रहे है। वहां के बारे में मान्यता है कि भगवान शिव भष्मासुर से बचने के लिए भागते समय इसी स्थान से गुजरे थे। जहां एक पत्थर पर अब भी भगवान शिव के पैर और भष्मासुर के घोड़े के पैरों के निशान है।

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