संविदा अवधि बढ़ाई नहीं, हर माह किया जा रहा था भुगतान, बाबू सस्पेंड

संविदा कर्मचारियों

भिंड| मध्य प्रदेश के भिंड में जिला शिक्षा केंद्र में संविदा पर कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों को बिना संविदा अवधि बढ़ाए हुए हर माह वेतन का भुगतान किया जा रहा था। इस गड़बड़ी को कलेक्टर ने पकड़ा, गड़बड़ी सामने आने पर कलेक्टर छोटे सिंह ने बाबू (एपीसी ईएंडएम) पवन गुप्ता को निलंबित कर दिया। 19 माह से 54 अधिकारियों-कर्मचारियों को वेतन का भुगतान किया जा रहा है। 19 माह में भुगतान की गई यह राशि करीब 1.71 करोड़ होती है।

दरअसल शनिवार को जिला शिक्षा केंद्र की समीक्षा बैठक थी। बैठक के दौरान ही कलेक्टर ने यह गड़बड़ी पकड़ी। गड़बड़ी सामने आने के बाद कलेक्टर ने बाबू को निलंबित करने और अकाउंटेंट की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन अभी इस पर निर्णय नहीं किया गया है कि बिना संविदा अवधि बढ़ाए 19 माह में करीब 1.71 करोड़ के भुगतान की वसूली की जाएगी या नहीं। कलेक्टर की कार्रवाई से जिला शिक्षा केंद्र के अधिकारियों-कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। 

समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर छोटे सिंह ने इस गड़बड़ी को पकड़ा, उन्होंने बताया कि 2 माह पहले जिला शिक्षा केंद्र के अधिकारियों के साथ बैठक कर काम के टारगेट दिए थे, शनिवार को दिए गए टारगेट पर कितना काम हुआ, यह जानने के लिए समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया था। कलेक्टर की मौजूदगी में बैठक हुई। समीक्षा में जिला शिक्षा केंद्र की प्रोग्रेस रिपोर्ट में 2 माह में कोई अंतर नहीं आया। कलेक्टर ने संविदा अधिकारियों-कर्मचारियों की जानकारी मांगी। कलेक्टर ने यह भी पूछा कि इनकी संविधा अवधि कब बढ़ाई गई है। इसी दौरान मामला पकड़ में आ गया। कलेक्टर ने बैठक में ही बाबू (एपीसी ईएंडएम) पवन गुप्ता को निलंबित करने और अकाउंटेंट (एपीसी फाइनेंस) सुरेंद्र जैन के विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। जिला शिक्षा विभाग में कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए संविदा आधार पर कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है। इन कर्मचारियों को एक समयावधि के लिए नियुक्त किया जाता है और समय अवधि बीत जाने पर या तो वह बाहर कर दिए जाते हैं या जरूरत के हिसाब से उनको एक्सटेंशन दिया जाता है। लेकिन भिंड जिला शिक्षा विभाग में घोर लापरवाही सामने आई है। यहां पर जिले में पदस्थ 54 कर्मचारियों को मार्च 2018 के बाद उनकी सेवा अवधि समाप्त होने पर कोई एक्सटेंशन नहीं दिया गया, जबकि उनका वेतन लगातार आहरित किया जाता रहा।