PWD अधिकारियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष विवेचना के लिए HC में याचिका पेश

भिण्ड।गणेश भारद्वाज।

भिण्ड में लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार हृदेश शर्मा द्वारा विभाग के अधिकारियों द्वारा जारी किए गए फर्जी कार्य पूर्णत: प्रमाण पत्र के संदर्भ में पुलिस थाना थाटीपुर में दर्ज अपराध क्रमांक612/19 आईपीसी की धारा 409 के तहत उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर में ऑनलाइन याचिका दायर की गई, किंतु तकनीकी कारणें के चलते याचिका पर गुरुवार को सुनवाई नहीं हो सकी। इस याचिका अगली सुनवाई अगले हफ्ते तक स्थगित की गई है।

विदित हो कि कॉन्ट्रेक्टर हृदेश शर्मा द्वारा पुलिस थाना थाटीपुर में 29 जुलाई 19 को शिकायती आवेदन प्रस्तुत कर विभागीय अधिकारियों द्वारा की गई धोखाधड़ी के संदर्भ में शिकायत प्रस्तुत की गई थी, जिस पर कोई कार्रवाई ना होने से हृदेश शर्मा द्वारा जनसुनवाई में पुलिस अधीक्षक को आवेदन दिया गया, जिस पर पुलिस थाना थाटीपुर ने हृदेश कुमार शर्मा के आवेदन गत वर्ष 13 नवंबर को प्राथमिक प्रथम दृष्टया अपराध मानते हुए धारा 409 के अंतर्गत अमानत में खयानत का मामला दर्ज किया गया था, जिसके विरुद्ध पीडब्ल्यूडी के आरोपित अधिकारियों द्वारा अग्रिम जमानत आवेदन जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया जो कि माननीय न्यायालय के द्वारा खारिज कर दिया गया। उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर में अग्रिम जमानत हेतु आवेदन प्रस्तुत कर आरोपित अधिकारी तत्कालीन कार्यपालन यंत्री प्रदीप जैन, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री एसएस ठाकुर, तत्कालीन सहायक यंत्री दिनेश शर्मा, उपयंत्री गोहद प्रहलाद तोमर ने उच्च न्यायालय में सहमति से फर्जी कार्य पूर्ण प्रमाण पत्र के समान राशि की बैंक गारंटी जमा करने की शर्तों पर अग्रिम जमानत माननीय न्यायालय से 15 दिवस की अवधि में संबंधित थाना थाटीपुर में जमा कराने के आधार पर स्वीकृत कराई थी, उसके बाद लोक निर्मण विभाग के अधिकारियों द्वारा पुन: माननीय न्यायालय में 125 लाख की बैंक गारंटी जमा करने की शर्त को विलोपित करने हेतु याचिका प्रस्तुत की गई जिसको माननीय न्यायालय ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि आप अभियुक्तगणों द्वारा सहमति से उक्त बैंक गारंटी की शर्त को स्वीकार किया गया है, इसलिए इसको हटाया जाना न्याय के विरुद्ध है। क्योंकि माननीय न्यायालय द्वारा 125 लाख रुपए जमा करने की जो शर्त संबंधित आरोपी अधिकारियों को सहमति से दी गई थी उक्त शर्त का पालन ना होने से फरियादी द्वारा माननीय न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की गई जिसमें माननीय न्यायालय द्वारा न्याय संगत कार्रवाई करते हुए फरियादी द्वारा स्वतंत्रता के साथ उक्त याचिका खारिज करा ली गई थी।
पीडि़त ठेकेदार द्वारा माननीय न्यायालय के निर्देशानुसार विवेचक मुनीष राजौरिया द्वारा न्यायालय के समक्ष झूठी गवाही देने के संबंध में व आरोपित अधिकारियों द्वारा न्यायालय से प्राप्त जमानत की शर्तों का हा पालन होने वह न्यायालय ने 125 लाख की बैंक गारंटी जमा करने की शर्त को यथावत रखने से उक्त बैंक गारंटी जमा नहीं करने से न्यायालय के आदेशानुसार उक्त आरोपी फरार होकर विवेचक मुनीष राजौरिया के द्वारा न्यायालय के आदेशों को नजरअंदाज करते हुए लाभ दिया गया है और लगातार निरंतर दिया जा रहा है। पुलिस विवेचक मुनीष राजौरिया द्वारा माननीय न्यायालय के आदेशों का अपालन एवं जमानत की शर्तों उल्लंघन होने से सभी आरोपी अधिकारियों को गिरफ्तार कर चालान माननीय न्यायालय में प्रस्तुत करना चाहिए था, जो ना करते हुए आरोपियों को लगातार अनुचित लाभ देकर अवैध संरक्षण दिया जा रहा है, इन सभी बिंदुओं को लेकर याचिका माननीय न्यायालय में प्रस्तुत की गई थी, जिसकी तकनीकी कारणों चलते गुरुवार को सुनवाई में नहीं हो सकी। इस मामले में सुनवाई अब अगले हफ्ते होगी।

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