भोपाल प्रशासन का तुगलकी फरमान, केंद्रीय जांच दल ने उठाए सवाल

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भोपाल

तेरहवीं शताब्दी में मोहम्मद तुगलक (tughlaq) नाम का एक शासक था जो अपने अजीब विवादास्पद फरमानों के कारण हमेशा विवादों में रहा। भोपाल प्रशासन भी आजकल कुछ ऐसा ही करना दिख रहा है, जब शहर के सबसे संक्रमित इलाके से लोगों की शिफ्टिंग के लिये प्रशासन ने निर्णय लिया और उन्हें अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाने लगा। लेकिन मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियुक्त टीम के दो डॉक्टर्स यहां पहुंचे तो उन्होने इसपर गंभीर आपत्ति जताई और शिफ्टिंग को लेकर सवाल खड़े किये कि आखिर ऐसा बेतुका निर्णय क्यों लिया गया, क्योंकि इस सर्वाधिक प्रभावित इलाके से लोगों को जहां शिफ्ट किया जाएगा, वहां भी कोरोना संक्रमण का खतरा फैल जाएगा।

बता दें कि इंदौर के बाद अब राजधानी की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। पुराने भोपाल (bhopal) में लगातार पॉजिटिव केस सामने आने के बाद इस डेंजर ज़ोन पर केंद्र की नजर भी पड़ी है। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग (central health department) की एक विशेष टीम (special team) मंगलवार को स्थिति का जायज़ा लेने जहांगीराबाद (jahangirabad) पहुंची। जहांगीराबाद सहित पुराने भोपाल के अधिकांश स्थानों पर घनी बस्तियां हैं और संकरी सड़कें हैं। ऐसे में टीम ने यहां पहुंचकर देखा कि कई मकानों में 8 से लेकर 20 लोग तक एक साथ रह रहे हैं। इसपर टीम ने जिला प्रशासन (district administration) के अधिकारियों से सवाल किया कि इन हालात में कोरोना संक्रमण की सर्वाधिक आशंका है और वो इसे लेकर क्या कर रहे हैं। अधिकारियों द्वारा कहा गया कि यहां से स्वस्थ लोगों को कहीं और शिफ्ट किया जा रहा है, जिसपर केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की टीम भड़क गई। टीम में शामिल डॉक्टर अंकुर और डॉक्टर अत्रे ने अधिकारियों से कहा कि ये कोरोना संक्रमण फैलने का एक और नया कारण बन जाएगा। यहां के स्वस्थ लोगों को कहीं और शिफ्ट करने की बजाय उन्होने जिला प्रशासन को यहीं सारी सुविधाएं मुहैया कराने की ताकीद की। वहीं ये भी कहा कि इस इलाके में सोशल डिस्टेंस का कड़ाई से पालन और मूवमेंट रोकना सबसे जरूरी है। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कहा इस इलाके को सील करने और ज्यादा से ज्याया सेंपलिंग के निर्देश दिए हैं।

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