MP में आज भी झोपडी या कच्चे मकान में जिदंगी गुजार रहे 39 लाख परिवार

भोपाल। केंंद्र एवं राज्य सरकारों की ओर से गरीबों को आवास दिलाने के लिए तमाम आवासीय योजनाएं संचालित की जा रही हैं, इसके लिए बावजूद भी प्रदेश की बड़ी आबादी झोंपडिय़ों में जीवन बिताने को मजबूर है। हाल ही में राज्य सरकार द्वारा कराए गए सर्वे में यह आवास की जमीनी हकीकत सामने आई है। जिसके तहत प्रदेश में 39 लाख से ज्यादा परिवार कच्चे घरों में जिंदगी काट रहे हैं। 

सरकारों ने पिछले कुछ सालों में बेघरों को घर दिलाने के लिए शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में तमाम आवास योजनाएं चलाई है। केंद्र सरकार ने 2022 तक सभी परिवारों को घर देने का ऐलान किया है। लेकिन मप्र के ग्रामीण अंचल के जो आंकड़े सामने आए हैं, उससे सभी को घर देने के सरकारी दावों की पाल खुलती नजर आ रही है। खास बात यह है वर्ष 2016 में आई प्रधानमंत्री आवास योजना भी इन परिवारों की तकदीर नहीं बदल पाई है। राज्य सरकार ने इन परिवारों की सूची एप प्लस आवास पोर्टल पर अपलोड की है और परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार से 48 हजार करोड़ रुपए की मांग की है।

केंद्र सरकार ने इन परिवारों को पक्के मकान बनाने के लिए 48 हजार करोड़ की मांग कर दी है। विभाग के सूत्र बताते हैं कि अभी तक केंद्र की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चयनित हितग्राही को एक लाख 20 हजार रुपए और पहाड़ी क्षेत्र में मकान निर्माण के लिए एक लाख 30 हजार रुपए दिए जाते हैं। यहां बता दें कि राज्य सरकार ने वर्ष 2016 में ऐसे 31 लाख परिवार तलाशे थे, जिनके पास पक्के मकान नहीं हैं। बाद में शिकायतें हुईं कि बड़ी संख्या में ऐसे परिवार सर्वे से छूट गए हैं। सरकार ने दोबारा सर्वे कराया, तो 39 लाख परिवारों की सूची बन गई। अब इन परिवारों को पक्के मकान दिलाने की मशक्कत शुरू हुई है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने परिवारों की सूची एप प्लस पोर्टल पर अपलोड कर दी है।

योजनाओं में भ्रष्टाचार, आधे घरों का पूरा पैसा निकाला

ज्यादातर आवास योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। ग्रामीण अंचल में आवास योजनाओं के तहत बनवाए गए घर अधूरे पड़े हैं। जिसकी वजह योजना के तहत हितग्राहियों को पूरा पैसा नहीं मिला है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में उसे पूरा पैसा मिल चुका है और पूरा घर भी बन चुका है।  सामाजिक एवं आर्थिक सर्वे 2011 के आधार पर वर्ष 2016 में ग्रामीण क्षेत्रों में पहली बार कच्चे मकान या झोपड़ी में रहने वाले परिवारों का सर्वे किया गया था। तब ऐसे 31लाख परिवार मिले थे। इनमें से 13.70 लाख परिवारों को राशि देकर पक्के मकान बनवा दिए गए हैं। वहीं, छह लाख से ज्यादा परिवारों को राशि देकर मकान निर्माण कार्य शुरू करवा दिया गया है, जो जून 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं योजना के तहत बनने वाले मकानों की डिजाइन को लेकर ग्रामीणों ने आपत्ति ली है। उनका कहना है कि मकान में उन्हें रहना है, इसलिए डिजाइन का बंधन नहीं होना चाहिए।