प्रदेश के साढे़ चार लाख किसानों को नहीं मिलेगी कर्ज माफी, ये है बड़ी वजह

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भोपाल। मध्यप्रदेश में जय किसान फसल ऋण माफी योजना में 15 जनवरी से पाँच फरवरी तक 50 लाख 40 हजार 861 पात्र किसानों द्वारा आवेदन जमा किये गये हैं। अभी तक 43 लाख 50 हजार आवेदन पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज किये जा चुके थे। आवेदन ऑनलाइन दर्ज करने का कार्य निरतंर जारी है। पहले चरण में कर्ज माफी में प्रदेश के करीब साढ़े चार लाख किसानों को शामिल नहीं किया गया है। ये किसान सरकार की योजना के मुताबिक पात्रता नहीं रखते हैं। 

दरअसल, सरकार ने किसान कर्ज माफी योजना के कुछ पैमाने तय किए हैं। योजना में ऐसे कसानों को शामिल नहीं किया गया है जो करदाता हैं, जनप्रतिनिधि और सरकारी कर्मचारी हैं। ऐसे लोगों को किसानोंं में शामिल नहीं किया गया है। इसलिए पहले चरण में ऐसे करीब साढ़े चार लाख लोग हैं जो इस योजना से बाहर हैं। सरकार द्वारा निर्धारित फॉर्म को भरने के बाद किसानों का वर्गीकरण किया गया है। पहले चरण में ऐसे किसानों का चयन किया गया है जो 50 हजार रुपए तक के कर्जदार हैं। राज्य सरकार ने शीत सत्र में अनुपूरक बजट में पांच हजार करोड़ रुपए का बजट किसान कर्ज माफी के लिए रखा है। 

सरकार चाहती है ऐसे कसानोंं के बैंक खातों में कर्ज की रकम जमा करदी जाए। सरकार का प्रयास है अधिक से अधिक किसानों को पहले चरण में लाभ मिल सके। क्योंकि मार्च के पहले सप्ताह में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर आचार संंहिता लागू हो जाएगी। जिसके बाद सभी सरकारी कामकाज की रफ्तार चुनाव तक थम जाएगी। जिन किसानों ने दो लाख तक का लोन लिया है, सरकार उनके भी खातों में 50 हजार तक जमा करने पर विचार कर रही है। पहले चरण में सरकार ऐसे कुछ किसानों को चयनित करना चाहती है जिन्होंंने दो लाख तक का कर्ज ले रखा है। जिससे लोकसभा चुनाव से पहले किसानों और जनता में अच्छा संदेश जाए। कृषि मंत्री सचिन यादव ने कहा है कि मान्य आदेवनों की स्क्रूटनी की जा रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल योजने के लिए जिन्होंने फार्म जमा किए हैं और योजना के लिए वह पात्र पाए गए हैं। इन्हें कर्जमाफी योजना का लाभ मिलेगा। वित्त विभाग लगातार बैंकों से भी कर्ज माफी को लेकर चर्चा कर रहा है। 

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