मध्यप्रदेश में जल्द दिखाई देगा अफ्रीकी चीता, भारत सरकार ने भेजी टीम

वन मंत्री शाह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि मध्य प्रदेश के पास अब 526 टाइगर हैं| हिंदुस्तान में हम टाइगर स्टेट का दर्जा लिए हुए हैं| बाघों के लिए जल्द ही और नेशनल पार्क, सफारी, अभ्यारण बनाये जाएंगे|

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| गुजरात से बब्बर शेर न मिलने की स्थिति में अब मध्य प्रदेश सरकार अफ्रीकी चीतों (African Cheetah) को मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) लाने की तैयारी कर रही है| इन चीतों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की एक टीम भेजी है| वन मंत्री विजय शाह (Forest Minister Vijay SHah) ने कहा कि कूनो या गाँधी सागर अभयारण्य में जल्दी ही अफ्रीकी चीते देखने को मिल सकते हैं।

वन मंत्री शाह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि मध्य प्रदेश के पास अब 526 टाइगर हैं| हिंदुस्तान में हम टाइगर स्टेट का दर्जा लिए हुए हैं| बाघों के लिए जल्द ही और नेशनल पार्क, सफारी, अभ्यारण बनाये जाएंगे| मंत्री ने कहा कि कूनो पार्क में अब तक बब्बर शेर के आने का इन्तजार कर रहे थे, लेकिन अब यहां अफ्रीकी चीते को लाया जाएगा| भारत सरकार ने यहाँ टीम भेजी है| कूनो या गाँधी सागर अभयारण्य में जल्दी ही अफ्रीकी चीते देखने को मिलेंगे|

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की अनुमति फरवरी 2020 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण काे दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि इन चीताें काे अनुकूल वन क्षेत्र में ही रखा जाए। गुजरात से बब्बर शेर न मिलने की स्थिति में भारत सरकार ने 2010 में कूनो पालपुर में चीता बसाने की परियोजना पर काम शुरू किया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगी और कोर्ट ने परियोजना पर रोक लगा दी थी। गांधी सागर और माधव पार्क भी प्रदेश में कूनो पालपुर नेशनल पार्क और नौरादेही अभयारण्य के अलावा माधव नेशनल पार्क और गांधी सागर अभयारण्य भी चीतों के लिए तैयार हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय अभयारण्यों के लिए अफ्रीकी चीता लाने की इजाजत दे दी है| चीतों के लिए अनुकूल वातावरण और रहवास क्षेत्र का आकलन किया जा रहा है|

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