भोपाल। कोरोना (Corona) के खिलाफ जंग लड़ते हुए 3 महीने का समय बीत चुका है| गर्मी के मौसम की शुरूआत ही प्रदेश में कोरोना के कहर से हुई थी| अब मानसून (Monsoon) का सीजन लगभग शुरू हो चुका है| ऐसे में कोरोना के अलावा डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया जैसी सीजनल बीमारियों से भी लोगों को झूझना पड़ सकता है| अमूमन देखा जाता है कि मई के अंतिम सप्ताह से ही शहरभर में नगर निगम की गाडियां फोगिंग करना शुरू कर देती हैं| लेकिन इस बार ना तो निगम की गाडियां मच्छर मारने वाला धुंआ छोडती नजर आ रही हैं और ना ही घरों में टेस्टिंग शुरू हुई है|

बारिश के मौसम में और बारिश होने के बाद शहर में कई जगहों पर जलभराव की स्थिति हो जाती है, ऐसे में सितंबर और अक्टूबर का महीना आते-आते डेंगू चिकनगुनिया और मलेरिया जैसी बीमारियां पैर जमाने लगती हैं। हर साल मई-जून के महीने में मलेरिया से बचाव के लिए फागिंग, जन जागरूकता अभियान और सैंपलिंग शुरू हो जाती है जो इस साल कोरोना वायरस के कारण प्रभावित हुई है|

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ अखिलेश दुबे का कहना है कि कोरोना पर अब तक फोकस था लेकिन अब अन्य बीमारियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है | मलेरिया, चिकगुनिया, डेंगू से बचाव करने के लिए अलग-अलग विभागों से बातचीत की गई है, जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा| डेंगू और मलेरिया के लिए नगर निगम की मदद से फॉगिंग कराई जा रही है| मलेरिया की घर-घर जाकर जांच करने के लिए टीमें बनाई गई हैं, और उन्हें किट भी उपलब्ध कराई जाएगी। 56 फीवर क्लिनिक बनाये गए हैं, वहां डेंगू और मलेरिया की जांच की व्यवस्था है, मलेरिया की मुफ्त जांच की व्यवस्था भी की गई है| मलेरिया विभाग का यह भी दावा है कि वक्त रहते हैं सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी और संक्रमण लोगों पर हावी नहीं हो सकेगा| लेकिन तैयारियों को देखते हुए लगता नहीं कि इस बार मलेरिया विभाग समय रहते तैयारियां पूरी कर पाएगा| क्योंकि अभी तो शुरूआत ही नहीं हुई है…ऐसे में विभाग के दावे कितने सच्चे निकलते हैं यह तो वक्त आने पर ही पता चल सकेगा|