कमलनाथ के इस बड़े फैसले को पलटेगी शिवराज सरकार, मानसून सत्र में आएगा संशोधन विधेयक

भोपाल| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की पूर्व की कमलनाथ सरकार (Kamalnath Government) के बड़े फैसलों को सत्ता में आते ही भाजपा सरकार ने पलटना शुरू कर दिया है| अब शिवराज सरकार (Shivraj Government) एक और बड़े फैसले को पलटने जा रही है| महापौर और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के बीच से कराने के कांग्रेस सरकार के फैसले को बदला जाएगा। जनता ही महापौर और नगर पालिका अध्यक्ष को चुनेगी।

प्रदेश सरकार ने इसकी तैयारी कर ली है | मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नगरीय आवास एवं विकास विभाग के इस प्रारंभिक प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे चुके हैं। अब कैबिनेट में यह संशोधन प्रस्ताव लाया जाएगा, जिस पर मंजूरी मिलने के बाद इसे विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। सोमवार को मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस की अध्यक्षता में हुई वरिष्ठ सचिव समिति की बैठक में जुलाई में संशोधन विधेयक लाने की अनुमति नगरीय विकास एवं आवास विभाग को दी।

उल्लेखनीय है कि मप्र में 1999 से महापौर का चुनाव सीधे जनता यानी प्रत्यक्ष प्रणाली से हो रहा था। पिछली कांग्रेस सरकार ने इसमें संशोधन कर अप्रत्यक्ष प्रणाली को मंजूरी दे दी थी। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने नगर पालिका निगम एक्ट में बदलाव किया था, इसके तहत चुनाव में जीतकर आए पार्षद, महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष को चुन सकते थे। इसके साथ ही चुनाव से दो माह पहले तक वार्ड परिसीमन करने और कलेक्टर को चुनाव के बाद पहला सम्मेलन बुलाने का अधिकार दिया था। कमलनाथ सरकार के इस फैसले का भाजपा ने जमकर विरोध किया था| लेकिन सरकार ने अध्यादेश के जरिए व्यवस्था में बदलाव किया और फिर विधानसभा में नगर पालिका अधिनियम में संशोधन विधेयक पारित कराकर 27 जनवरी 2020 को इसे लागू कर दिया था। अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई वरिष्ठ सचिव समिति ने पुरानी व्यवस्था फिर लागू करने के लिए अधिनियम में संशोधन के लिए विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करने की अनुमति नगरीय विकास एवं आवास विभाग को दे दी है।

चुनाव से छह माह पहले तक ही वार्डों का परिसीमन
इसके साथ ही चुनाव से छह माह पहले तक ही वार्डों का परिसीमन हो सकेगा। प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत चुनाव से छह माह पहले निकाय व वार्ड की सीमा का परिसीमन रुक जाएगा। इसके बाद न तो नए निकाय का गठन होगा और न ही वार्ड की संख्या बढ़ेगी। कमल नाथ सरकार ने इस अवधि को घटाकर दो माह कर दिया था। चुनाव के बाद पहला सम्मेलन राज्य निर्वाचन आयोग ही बुलाएगा।