किसानों को राहत, चमक विहीन गेहूँ भी खरीदेगी सरकार

भोपाल| किसानों(Farmers) का पूरा अनाज खरीदा जाएगा। चमक विहीन गेहूं भी सरकार (government) खरीदेगी, कोरोना (Corona) की विपरीत परिस्थितियों में भी कार्य सुचारू रूप से शुरू किया गया, जिसके अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। किसानों को हर संभव सुविधाएं दी गई हैं। यह बातें सोमवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj SIngh chauhan) ने वीडियो कांफ्रेंस द्वारा राज्य में चल रहे गेहूं उपार्जन कार्य की जानकारी लेने के दौरान कही|

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार से उनकी चर्चा हुई है जिसमें चमक विहीन गेहूं खरीदने की अनुमति भी प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री श्री चौहान को जानकारी दी गई कि राज्य में 40 लाख 26 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन समर्थन मूल्य पर किया जा चुका है। प्रदेश के 7लाख 50 हजार किसानों से यह खरीदी की गई है। किसानों के खातों में 3171 करोड रुपए की राशि डाली जा चुकी है। उपार्जित गेहूं का 86 प्रतिशत परिवहन भी कर लिया गया है। प्रदेश के 24 जिलों में 90% परिवहन हो चुका है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा किसानों को खरीदी केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं दी जाए। सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह पालन हो। सौदा पत्र के माध्यम से किसानों को गेहूं बेचने की व्यवस्थाओं से अवगत करवाने के भी निर्देश दिए बैठक में बताया गया प्रदेश में करीब छह लाख मैट्रिक टन गेहूं इस व्यवस्था से खरीदा जा चुका है। इंदौर ,उज्जैन सहित लगभग 50 मंडी प्रांगण अभी बंद है और कोरोना के बड़े संकट के इस दौर में भी किसानों को काफी सुविधा प्राप्त हुई है। बैठक में जानकारी दी गई कि जहां मंडियां खुली हैं वहां तो खरीदी की पूर्ण व्यवस्थाएं हैं ही इसके अलावा किसान के घर से अनाज लेने का इंतजाम भी किया गया है। मंडियों में आने के लिए किसानों को संदेश भेजने की व्यवस्था में और सुधार किया जा रहा है। जहां अनाज लेकर आने वाले किसानों की संख्या कम है, वहां 20 के स्थान पर 30 और 40 एस एम एस भेज कर उन्हें आमंत्रित किया जा रहा है।

वीडियो कॉन्फ्रेंस में विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारियों ने उपार्जन से संबंधित जानकारी दी। प्रमुख सचिव कृषि श्री अजीत केशरी ने बताया कि भारत सरकार से बारदाना व्यवस्था के संबंध में सहयोग प्राप्त हो रहा है। राज्य में चना और सरसों की खरीदी का कार्य भी प्रारंभ होकर व्यवस्थित रूप से संचालित हो रहा है। कोरोना वायरस प्रभावित क्षेत्रों में स्थितियां सामान्य होते ही शेष किसान भी आसानी से गेहूं बेच सकेंगे, जिन्होंने अभी सौदा पत्रक व्यवस्था का लाभ नहीं लिया है।