17 साल बाद मजबूत विपक्ष की भूमिका में कांग्रेस, सदन में बुलंद होगी आवाज

कांग्रेस 17 साल की अवधि के बाद अपने 96 विधायकों के साथ राज्य विधानसभा में मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए तैयार है

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) की 28 सीटों पर उपचुनाव (Byelection) के परिणाम ने साफ़ कर दिया कि प्रदेश में भाजपा )(BJP) की सरकार बरकार रहेगी| नतीजों ने भाजपा सरकार को बहुमत में ला दिया| वहीं कांग्रेस (Congress) लम्बे समय बाद मजबूत विपक्ष की भूमिका में है|

कांग्रेस 17 साल के लम्बे समय बाद अपने 96 विधायकों के साथ राज्य विधानसभा में मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। हालाँकि संगठनात्मक रूप से बीजेपी अब भी मजबूत मानी जा रही है| सदन में 2003 से 2018 तक विपक्षी सीटों पर कांग्रेस का कब्जा रहा है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों में, कांग्रेस ने 41 (2003 में), 71 (2008 में) और 57 (2013 में) सीटें हासिल कीं। इन सभी वर्षों के दौरान विधानसभा में कांग्रेस विधायकों की संख्या कम थी, जिसके चलते सरकार को अपने विरोध की शक्ति दिखाने में विपक्ष विफल रहा। 28 सीटों पर हुए उपचुनावों में प्रभावशाली प्रदर्शन ने भाजपा को 126 विधायकों के साथ फिर से मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है| वहीं सदन में विपक्ष के रूप में कांग्रेस की स्थिति भी मजबूत हुई है|

मजबूती से सरकार को घेर सकेगी कांग्रेस
कांग्रेस अपने 96 विधायकों के साथ विधानसभा और बाहर जनता के मुद्दों पर एक मजबूत विपक्ष की आवाज उठाएगी। कांग्रेस, 17 वर्षों के बाद अब सरकार पर जोरदार हमला करने और सदन में उनके लिए असहज करने की स्थिति में है। जबकि विपक्षी कांग्रेस भाजपा को टक्कर देने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी, वे सात स्वतंत्र और अन्य दलों के विधायकों को भी अपने पक्ष में लाने की कोशिश करेगी, जो जनता के मुद्दों को उठाते हुए सरकार का समर्थन कर रहे हैं।

15 साल बाद सत्ता आई, 15 महीने में ही चली गई
2018 के विधानसभा चुनाव में, कांग्रेस को 15 साल से अधिक समय के बाद सत्ता पक्ष में बैठने का मौका मिला, लेकिन वह 15 महीनों से अधिक समय तक अपनी स्थिति को बनाए नहीं रख सकी और सरकार गिर गई| बीजेपी मार्च महीने में फिर सत्ता में लौट आई। चुनाव में 230 सीटों में से कांग्रेस 114, भाजपा 107 जीतने में कामयाब रही, जबकि चार निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा उम्मीदवार ने भी विधानसभा में जगह बनाई।

वर्ष 2003 में, भाजपा ने दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंका था| तब बीजेपी ने चुनावों में 165 सीटें जीतीं। कांग्रेस सिर्फ 41 सीटों तक सीमित रही। 2008 के चुनावों में, कांग्रेस ने संख्या बढ़ाई और 71 तक पहुंची| लेकिन 143 सीटों के साथ बीजेपी सत्ता में बनी रही।
2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने फिर वापसी की और कांग्रेस को बड़ी हार दी और उसे 57 सीटों तक सीमित कर दिया। 165 विधायकों वाली बीजेपी लगातार तीसरी बार सत्ता में आई|