यूं ही आखिर कोई “शिवराज” नहीं हो जाता

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भोपाल, हरप्रीत कौर रीन। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की संवेदनशीलता का एक बड़ा उदाहरण फिर सामने आया है। उत्तराखंड में बस हादसे में मारे गए लोगों की सूचना पाते ही मुख्यमंत्री सीधे उत्तराखंड पहुंच गए और वहां पहुंच कर उन्होंने व्यवस्थाओं को परिवार के मुखिया की तरह अपने हाथ में ले लिया।

यूं ही आखिर कोई "शिवराज" नहीं हो जाता

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परिवार के किसी व्यक्ति का दुनिया से चला जाना इससे बड़ा दुख कोई हो नहीं सकता। लेकिन जब संवेदनाओं का मरहम बनकर प्रदेश का मुखिया साथ खड़ा हो जाए तो निश्चित रूप से परिवार के लिए इससे बड़ा कोई संबंल नहीं। उत्तराखंड के डकाटा में पन्ना से गये चारधाम तीर्थ यात्रियो की बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई और उसमें 26 लोगों की मौत हो गई और 4 घायल हो गए। घटना की सूचना मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लगी और उन्होंने अविलंब पूरी व्यवस्थाओं को अपने हाथ में ले लिया। अपने पहले से तय सारे कार्यक्रमों को छोड़कर मुख्यमंत्री अपने एक मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह को साथ लेकर रात में ही उत्तराखंड रवाना हो गए और पूरी रात जागकर व्यवस्थाएं देखते रहे। मुख्यमंत्री ने न केवल मृतकों के परिजनों के साथ लगातार संवाद कर उन्हें संबल बंधाया बल्कि घायलों के उचित उपचार की व्यवस्था को भी देखा।

यूं ही आखिर कोई "शिवराज" नहीं हो जाता

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दुर्घटना में मृत हुए प्रदेश के लोगों के लिए मुख्यमंत्री ने पांच पांच लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की। पूरी रात जागने के बाद मुख्यमंत्री ने सुबह उठते ही सबसे पहले दुर्घटना में अपनी जिंदगी गवा बैठे लोगों के पोस्टमार्टम से लेकर उनकी पार्थिव देह को पन्ना तक पहुंचाने के लिए प्रयास तेज किए। यह पहला उदाहरण नहीं जब शिवराज की यह संवेदनशीलता सामने आई हो। आपदा की हर घङी में चाहे किसान हो या गरीब आदमी, शिवराज का हाथ हमेशा आम आदमी के साथ नजर आता है। उनके कट्टर समर्थक भले ही उनमें लाख बुराइयां खोज ले लेकिन जब बात संवेदनशीलता की आती है तो शिवराज सब पर भारी पड़ते हैं। राजनीति के चलते कांग्रेस भले ही इस तरह के प्रयासों को इवेंट मैनेजमेंट का नाम दें लेकिन सच तो यह है कि जिस पर गुजरती है वही जानता है और पन्ना के हादसे में दिवंगत आत्माओं के परिजनों के लिए इस समय सबसे बड़ा सहारा यदि कोई है तो वह शिवराज का साथ।

यूं ही आखिर कोई "शिवराज" नहीं हो जाता