बीजेपी विधायक की दिग्विजय सिंह को खुली चुनौती, इस मुद्दे पर बहस को तैयार

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भोपाल। लोकसभा चुनाव को लेकर भोपाल सीट पर हिंदुत्व के मुद्दे से शुरू हुआ चुनाव अब विकास की बहस पर आ गया है। कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने कार्यकाल में किए गए विकासकार्य कि लिस्ट सोशल मीडिया पर शेयर कर जनता को लुभाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, भोपाल की हुजूर विधानसभा से बीजेपी विधायक रमेश्वर शर्मा ने भी पलटवार करते हुए बीजेपी सरकार में भोपाल के लिए जो काम किए गए हैं उनका चिट्ठा पेश किया। यही नहीं उन्होंने दिग्गी को विकासकार्य को लेकर खुली बहस करने की चुनौती भी दी। 

दिग्विजय सिंह ने उनके कार्यकाल में भोपाल की याताया व्यवस्था को सुधारने के लिए  वीआईपी रोड के निर्माण के बारे में बताया। उनके इस दावे पर शर्मा ने पलटवार किया और कहा कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा और बाबूलाल गौर ने यह काम पूरा करवाया था। यही नहीं सिंह ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, वीआईपी रोड, टीटी नगर स्टेडीयम, भदभदा पुल, आरजीटीयू, भोपाल गेस राहत अस्पताल, क्षेत्रिय विज्ञान केंद्र, पुलिस अकादमी, नेशनल संस्कृत इंस्टीट्यूट, जैसे कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी ने विकासकार्य कम किए हैं और उनका गुणगान अधिक किया है। उन्होंंने कहा कि भोपाल का अंतिम मास्टरप्लान 1995 में पेश किया गया था। 

पूर्व सीएम को जवाब देते हुए, शर्मा ने कहा, “अगर सिंह ने कुछ किया होता, तो उनकी सूची छोटी नहीं होती और बीजेपी द्वारा विकास कार्यों की सूची इतनी लंबी नहीं होती”। शर्मा ने भाजपा सरकार के दौरान उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि नर्मदा का पानी, कोलार में केरवा का पानी, SAI स्पोर्ट्स एकेडमी, कोलार में सीवेज प्लान, भुनेरी में IISER, पुलिस ट्रेनिंग सेंटर, AIIMS, लालघाटी-सिंगारचोली ब्रिज, चेतक ब्रिज अपग्रेडेशन, लालघाटी में ग्रेड सेपरेटर, विलय की समस्या का समाधान, वल्लभ भवन का नया भवन, न्यू मार्केट, एमपी नगर और संत हिरदाराम नगर में बहु-स्तरीय पार्किंग, हमीदिया अस्पताल की उन्नति, पीएचक्यू बिल्डिंग, शौर्य स्मारक, श्रमोदय स्कूल, नया रवींद्र भवन, भोपाल बाईपास रोड, अटल बिहारी हिंदी विश्वविद्यालय, नर्मदा भवन और राजा भोज हवाई अड्डे और हबीबगंज रेलवे स्टेशन का उन्नयन, सभी राज्य में भाजपा सरकार के दौरान हुआ और हुआ। शर्मा ने कहा कि कई काम थे और अगर दिग्विजय उनकी बात सुनना चाहते हैं तो उन्हें इस पर खुली बहस की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए।