Monkey Pox को लेकर “मध्यप्रदेश में अलर्ट जारी”, सभी जिलों में निगरानी करने के निर्देश

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। यूरोप के कई देशों सहित अमेरिका, आस्ट्रेलिया में मंकी पाक्स (Monkey Pox) के मामले आने के बाद इसे लेकर भारत में भी सक्रियता नजर आ रही है। यहां पर इस बीमारी के मामले न फैलें, इसके लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सभी प्रदेशों को एडवाइजारी जारी करने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी को अलर्ट कर दिया है। विभाग ने पिछले 21 दिनों में प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों को अपने टेस्ट करवाने के लिए कहा है। वही अब मध्यप्रदेश में भी मंकी पाक्स को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के सीएमएचओ को इसकी निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही विदेश से आने वाले यात्रियों और संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों के सैंपल एनआईवी पुणे भेजने के निर्देश दिए गए है।

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कोरोना संक्रमण से कुछ राहत मिलने के बाद अब मंकी पॉक्स ने एक बार फिर लोगों में सनसनी फैला दी है, कई देशों में मामलें सामने आने के बाद भारत देश में इसे लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है ताकि स्वास्थ्य विभाग का अमला मंकी पॉक्स से निपटने तैयार रहे वही लोग सतर्क रहे, मध्यप्रदेश में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइन जारी कर सकता है। अभी तक 11 देशों में मंकी पॉक्स बीमारी के केस मिले हैं। पहले यह बीमारी बंदरों में मिली और अब लोगों में भी फैल रही है। हालांकि भारत में अभी कोई मामला नहीं आया है, केन्द्र सरकार की जारी एडवायजरी में कहा गया है कि सभी स्वास्थ कर्मचारियों को इसके बारे में जानकारी दी जाए, ताकि यह बीमारी न फैले।

मध्यप्रदेश में जारी ये हैं निर्देश : 

अगर प्रभावित देश से कोई व्यक्ति आ रहा है और उसमें किसी भी प्रकार का लक्षण है तो उसे आइसोलेट करके रखें और उसके सैंपल लेकर जांच के लिए एनआईवी पुणे भेजें। अगर कोई संक्रमित आता है तो उसके संपर्क में आने वालों की तलाश की जाए। समय रहते सतर्कता से इस संक्रमण को रोका जा सकता है।स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि इसको लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। जागरूक रहने की जरूरत है।

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क्या है मंकी पाक्स : 

इस बीमारी में बुखार, त्वचा में रैश और कई तरह की स्वास्थ्य परेशानियां आ सकती हैं। इसके लक्षण दो से चार सप्ताह तक रहते हैं। यह बीमारी बंदरों से आदमी और आदमी से आदमी को हो सकती है। इस बीमारी का वायरस कटी हुई त्वचा, श्वास नाली, नाक, मुंह के जरिये शरीर में प्रवेश करता है। यह बीमारी अधिकतम 21 दिनों तक रहती है। संक्रमित व्यक्ति एक से दो दिनों के बीच इस बीमारी के संक्रमण को फैला देता है।