भोपाल।
1987 बैच की आईएएस अफसर गौरी सिंह के बाद अब 1984 बैच के मप्र कैडर के अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी आलोक श्रीवास्तव ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) को मंजूरी मिल गई है।सरकार ने इस संबंध में प्रस्ताव केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय को भेजा था, जिसने श्रीवास्तव को वीआरएस की अनुमति दे दी है।उन्होंने वीआरएस के लिए 20 दिसंबर 2019 को आवेदन दिया था।

दरअसल,बीते दिसंबर में भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग में सचिव के पद पर पदस्थ श्रीवास्तव ने राज्य सरकार से वीआरएस की अनुमति मांगी थी, जिसे सरकार ने मंजूरी दे दी है।।श्रीवास्तव को 31 जनवरी को वीआरएस दे दिया जाएगा। गौरी सिंह के साथ आलोक श्रीवास्तव को भी नियमों को शिथिल करके वीआरएस दिया गया है। वैसे 1984 बैच के आईएएस श्रीवास्तव 30 जून, 2020 को सेवानिवृत्त हो रहे थे, लेकिन अपने कार्यकाल से पहले ही उन्होंने वीआरएस ले लिया।

श्रीवास्तव वीआरएस के बाद नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रियूनल (एनसीएलएटी) ज्वाइन करने जा रहे हैं। वे कोल इंडिया में सीएमडी का पद संभालेंगे। अग्रवाल को अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम 1958 के नियम 5ए के तहत डीम्ड रिटायर किया गया है, ताकि उन्हें रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले तमाम लाभ मिल सकें। अग्रवाल को रिटायरमेंट के लाभ के साथ पेंशन भी मिलेगी। श्रीवास्तव 16 अप्रैल 2012 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं और जून 2020 में रिटायर होने वाले थे।

गौरी सिंह भी ले चुकी है स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति
इससे पहले 1987 बैच की आईएएस अफसर अपर मुख्य सचिव गौरी सिंह के स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ली थी। जबकी सिंह की सेवानिवृत्ति में लगभग पौने चार साल का वक्त बाकी था, लेकिन उन्होंने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय संस्था में काम करने का रास्ता चुना। 31 दिसंबर उनकी सरकारी नौकरी का आखिरी दिन रहा।