सुलग रही बगावत : दिल्ली में जमेगा आंगन, पहुंचेगे आंगनवाड़ी कर्ता-धर्ता

भोपाल।  लाखों की तादाद में मौजूद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सरकारी और प्रशासनिक नजर अंदाजी से नाराज हैं। अपने भविष्य को लेकर चिंतित आंगनवाड़ी कर्ताधर्ता अपने हक की लड़ाई के लिए दिल्ली में जमा होकर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं। मप्र में भी इसके लिए गुपचुप अभियान शुरू हो गया है। तारीख तय होने के बाद इनका कूच दिल्ली की तरफ होने की उम्मीद की जा रही है। 

देशभर की आंगनवाडिय़ों में मौजूद करीब 14 लाख से ज्यादा कार्यकर्ता, सहायिका और अन्य सहयोगी कर्मचारी अपने भविष्य के लिए चिंतित नजर आने लगी हैं। इस असमंजस की वजह केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग स्मृति ईरानी द्वारा दिया गया वह बयान माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि देशभर में किसी भी राज्य में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित न किया जाए। इसका आधार बताते हुए उन्होंने कहा है कि ऐसा कोई कानूनी प्रावधान मौजूद नहीं है, जिसके चलते आंगनवाड़ी से संबद्ध कार्यकर्ता, सहायिका और अन्य कर्मचारियों को नियमितीकरण का लाभ दिया जाए। 

सुलगने लगी बगावत

केन्द्रीय मंत्री के बयान का असर जहां पूरे देश में दिखाई दे रहा है, वहीं इसका प्रभाव मप्र में भी बगावत के रूप में पनपता नजर आने लगा है। आंगनवाड़ी से जुड़े संगठनों द्वारा गुपचुप तरीके से चलाई जा रही मुहिम में सोशल मीडिया ग्रुप में दिल्ली कूच करने की बात कही जा रही है। इसको लेकर चलाए जा रहे संदेशों में कहा जा रहा है कि हम किसी सरकार के खिलाफ  बात नहीं करते लेकिन हमें न्याय चाहिए, हम न्याय की बात करना चाहते हैं। सभी राज्यों की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बहनों से अपील है कि कोई एक  तारीख निश्चित करें और दिल्ली में घेराव किया जाना चाहिए। अब शांत रहने से काम नहीं चलेगा क्योंकि विधायक सांसदों का नियम बन जाता है और 1975 से कार्य करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं के लिए कोई नियम नहीं है। 

अत्याचार बर्दाश्त नहीं करेंगे

आंगनवाड़ी से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर हम मानदेय पर काम कर रहे हैं तो सारे विभागों के कार्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से क्यों करवाया जाता है। हजारों रुपए वेतन पाने वाला कर्मचारी कोई भी काम करने को तैयार नहीं है, सारे विभाग के लोग जिस काम को नकारते हैं, वह काम कलेक्टर द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दे दिया जाता है। सारे शोषण और अत्याचार इस छोटे वर्ग के लोगों के लिए ही बने हैं। 14 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता देश में है तो उतनी ही सहायिका भी मौजूद हैं और उससे कुछ कमी मिनी कार्यकर्ता हैं। इतनी बड़ी संख्या में कार्यरत रहने के बाद हम लोग शासन के गुलाम बने रहे तो हमारा वोट देने का कोई मतलब नहीं है। 

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