शिव ‘राज’ का एक और घोटाला उजागर, शक के घेरे में कई अफसर

भोपाल। शिवराज सरकार को गए हुए भले ही डेढ़ साल हो रहा हो लेकिन उनके कार्यकाल में हुए घोटाले अब तक उजागर हो रहे हैं। एक बार फिर प्रदेश में बीजेपी कार्यकाल में हुआ घोटाला सामने आया है जिसमें आदिवासी किसानों को जैविक खेती के नाम पर कई अफसरों ने खुद के वारे-न्यारे किये।

2017-18 का है मामला
आदिम जाति कल्याण विभाग ने 20 जिलों के आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया व भारिया किसानों को कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा के उत्पादन में सहयोग और प्रोसेसिंग, पैकेजिंग व मार्केटिंग के लिए कृषि विभाग को सौ करोड़ रुपए वर्ष 2017-18 में दिए थे। विभाग का मकसद साफ था कि जैविक खेती करने वाले आदिवासी किसानों को उन्न्त खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए ताकि उनके लिए खेती लाभ का सौदा बने सके। इससे खाद बीज खरीदकर किसानों को दिये जाने थे।

सितंबर 2018 में जैविक कृषि आदान सहायता अनुदान कार्यक्रम के लिए मिले सौ करोड़ रुपए से 14 जिलों के लिए लक्ष्य तय किए गए थे।  शहडोल, उमरिया, ग्वालियर, दतिया, श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, अशोकनगर और छिंदवाड़ा में  योजना लागू होनी थी। एमपी एग्रो नोडल एजेंसी थी जिसे सारी सामग्री सप्लाई करनी थी, लेकिन उसने जिन निजी कंपनियों को ठेका दिया उनपर आरोप है कि उन्होने बेहद घटिया सामग्री सप्लाई की जिसमें राख मिट्टी थी और पानी तक मिला था। इस तरह सिर्फ कागजों पर ही योजना को अंदाम होते दिखाया गया।

EOW ने अब इस केस की फाइल खोल ली है। इस मामले में बड़े अफसरों के फंसने की संभावना नजर आ रही है। इसमें अधिकांश किसानों को न तो खाद मिली और न ही कोई अन्य सामग्री। जिन्हें खाद मिली थी तो उसमें राख, मिट्टी और तरल पदार्थ के नाम पर पानी टिका दिया गया। पिछले विधानसभा सत्र में कांग्रेस के विधायक फुंदेलाल सिंह सहित अन्य विधायकों ने विधानसभा में इसे आदिवासियों के नाम पर बड़ा घोटाला करार देते हुए जांच की बात उठाई थी।

अब मामला EOW के पास है और उसने एक अलग टीम बनाकर इस मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है शिकायत से जुड़े तमाम दस्तावेज संबंधित विभाग से जुटाए जा रहे हैं। जैसे-जैसे सबूत मिलते जाएगे वैसे वैसे कार्रवाई आगे बढ़ती जाएगी। मामले में कई अधिकारियों को तलब कर उनसे पूछताछ की जा रही है।

 

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