डामोर के इस्तीफे से बदलेंगे विधानसभा के समीकरण, कांग्रेस के पास होगा स्पष्ट बहुमत

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भोपाल।

झाबुआ-रतलाम लोकसभा सीट से चुनाव जीते बीजेपी के जीएस डामोर को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया है। प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने ऐलान किया है डामोर सांसद बने रहेंगे और विधायक पद छोड़ेंगें। उनके इस एलान के साथ ही मध्य प्रदेश में अब झाबुआ सीट पर उप चुनाव होना तय है। वही इस फैसले के बाद कांग्रेस ने राहत भरी सांस ली है।इसकी वजह ये है कि 230 सदस्यों वाली विधानसभा में डामोर के इस्तीफे के बाद 229 सदस्य बचेंगे। इसमें स्पष्ट बहुमत के लिए 115 सदस्य कांग्रेस सरकार के पास हैं। कांग्रेस के लिए यह राहत तब तक बनी रहेगी, जब तक उपचुनाव नहीं हो जाता। ऐसे हालात में कांग्रेस सरकार को बाहर से किसी के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह 115 विधायकों के साथ बहुमत में होगी।

दरअसल, 230 सीट वाली विधानसभा में भाजपा के 109, जबकि कांग्रेस के 114 विधायक है। फिलहाल चार निर्दलीय, दो बसपा व एक सपा विधायक को साथ लेकर 121 विधायक को साथ लेकर कांग्रेस ने सरकार बना रखी है। ऐसे में डामोर के विधायक पद से इस्तीफा देने पर भाजपा की सीट एक और कम होकर 108 ही रह जाएगी और विधानसभा के समीकरण भी बदल जाएंगें।जिसके बाद विधानसभा में केवल 229  सदस्य बचेंगें। इस हिसाब से कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है। ऐसे हालात में कांग्रेस सरकार को बाहर से किसी के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह 115 विधायकों के साथ बहुमत में होगी और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार सुरक्षित बची रहेगी।हालांकि यह तब राहत रहेगी जबतक उपचुनाव नही हो जाते। ऐसे में भाजपा नेताओं के उस दावे को झटका लगा है, जिनमें वे कांग्रेस सरकार को अल्पमत में होने का आरोप लगाते आ रहे थे।

इसके अलावा उपचुनाव होने पर कांग्रेस फिर एक बार विधानसभा सीट पर काबिज होने का मौका मिल जाएगा। अगर कांग्रेस इस पर चुनाव जीतती है तो कांग्रेस के पास 116  विधायक हो जाएंगें जो कि स्पष्ट बहुमत पर्याप्त है। डामोर के विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद झाबुआ विधानसभा का उपचुनाव कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम कर सकता है।  यदि इस उपचुनाव में कांग्रेस जीत गई तो वह 116 विधायकों के साथ स्पष्ट बहुमत में आ जाएगी।

उपचुनाव होने तक राहत, समर्थन की जरुरत नहीं 

इस सीट पर उपचुनाव होने तक कांग्रेस के लिए राहत बनी रहेगी। ऐसे हालात में कांग्रेस सरकार को बाहर से किसी के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी।वह 115 विधायकों के साथ बहुमत में होगी और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार सुरक्षित बची रहेगी। ऐसे में भाजपा नेताओं के उस दावे को झटका लगने वाला है, जिनमें कांग्रेस सरकार के अल्पमत में होने का आरोप लगाया जा रहा था।वहीं यह स्थिति कम से कम अगले छह महीने तक बनी रहनी है, जबकि झाबुआ सीट पर उपचुनाव होना है। ऐसे में कांग्रेस के पास 115 विधायकों के संख्याबल के साथ विधानसभा में पर्याप्त सीटें होंगी और उसे फिलहाल बाहर से किसी के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी।

कांग्रेस के पास 114 सीटें, बीजेपी के पास 109 

बता दें कि मध्य प्रदेश में 230 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल सत्तारूढ़ कांग्रेस के पास 114 सीटें हैं, जबकि प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी के खाते में 109 सीटें हैं। सदन में बहुजन समाज पार्टी के पास दो सीटें, समाजवादी पार्टी के पास एक सीट और निर्दलीय विधायकों के पास चार सीटें हैं। प्रदेश कांग्रेस समिति के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा कि कुल 121 सदस्यों के समर्थन के साथ सीएम कमलनाथ की कांग्रेस सरकार के पास विधानसभा में पूर्ण बहुमत है।