क्योकि कोई उम्मीद से है…’कोरोना फाइटर्स एवं कोरोना सर्वाइवर को समर्पित आलेख’

क्योकि कोई उम्मीद से है ……….  
आलेख -रीतेश शर्मा ‘mg’
कहते है कि उम्मीद पे दुनिया कायम है और उसी उम्मीद के सहारे हमें अपनी सुनहरी यादों को हमेशा साथ रखना चाइए , ताकि कुछ अनचाहे समय में यह सुनहरी यादें हमारे सफर को आसान कर सकें।
हर व्यक्ति के जीवन मे कई बार अच्छा या बुरा वक्त आता है, पर हमे बुरे समय को भूल कर , बीते दिनों में गुज़रे अच्छे वक़्त की यादें हमेशा साथ रखना चाइये ,ऐसा करने से कठिन समय मे जिंदगी का सफर आसान बन जाता है, हम कितना भी मोटिवेट रहे,कितने भी सशक्त हो, कभी कभी निराशा आ ही जाती है , भले ही कुछ पलों के लिये सही हम सब डिप्रेसन के शिकार जरूर होते है , ऐसे समय मे उन गुजरे पलो को याद करने से मन खुश होता है और प्रायः ऐसा देखा गया है कि, जब कभी समय खराब होता है तो कई सारे दुःख भी एक दम आते है , ऐसा लगता है कि प्रभु सिर्फ हमारी परीक्षा ले रहा है और दुनिया के सारे दुःख हमे दे दिए हो, तब सिर्फ एक ही उपाय कारगर होता है वह है “सकारात्मक सोच” औऱ “सब ठीक होगा” खुद से कह कर खुद को आशावान करना ही इलाज है ।
अच्छे पलो की उम्मीद जगाना बहुत जरूरी है , क्योकि जैसे रात के बाद सुबह आती आती है वैसे ही दुख के बाद सुख आते ही है, यही प्रकृति का नियम भी , पतझर कैसी भी हो उम्मीदों का बसंत आता ही है , बस इसलिये कहा है “उम्मीद पे दुनिया कायम है” । चुकी परिस्थितियां हमारे बस में नहीं हम परिस्थितियों के वश में है समय कभी भी बदल सकता है तो हमें विपरीत परिस्थितियों में जीने का हौसला बनाए रखना होगा खुद को मोटिवेट रखना होगा क्योंकि जब आप घर के सदस्यों में सबसे बड़े होते या मुखिया होते हैं तो आपकी उम्मीदों से पूरा परिवार और बाकी सदस्य भी बंधे होते हैं और जब आप ही उम्मीद खो देंगे तो बाकी सदस्यों की उम्मीद भी टूट जाएगी । सेल्फ मोटिवेशन तभी आएगा जब आप ओरो को मोटिवेट करोगे , दिलासा बहुत बड़ी इनायत है इस दुनिया मे , हम जब बहुत परेशानी में होते है और तब लगता है दुनिया खत्म सी होने लगी है , तभी उस वक्त कोई अपना या कोई ऐसा व्यक्ति जिस पर हम भरोसा करते हैं उसे चाहते हैं वो फिर चाहे कोई दोस्त हो , अपना प्रिय हो, या फिर माता-पिता वह जब हमें दिलासा देते हैं और भरोसा रखने को कहते हैं तो बरबस ही उत्साह और हमारा मनोबल दुगना हो जाता है और फिर अपने दुखों को भूल कर उन खराब स्थिति से लड़ने और उसके उपाय खोजने लगते है । कभी कभी हमारे पास इनमे से कोई भी नही होता, हम अकेले होते है तो भी घबराना नही है क्योंकि दिलासा कभी-कभी अदृश्य मन से या कभी-कभी अद्वैत शकि ईश्वर से भी प्राप्त होता है जो खुद इंसान के अंदर मौजूद होता है, हम खुद को खुद से दिलासा देते हैं तो घोर निराशा से भरे मन को सुकून मिलता है , हमारे अंदर दो मन है एक भय दिखाता है तो उसी समय दूसरा मन आशावादी दृष्टिकोण लिए भी होता है , बशर्ते हम अपने ऊपर नकारात्मक मन के भावों को, एवं विचारों को हावी न होने दें, नकारात्मकता एक ऐसी कालकोठरी है जिसके भीतर एक बार इंसान चला गया तो फिर वह वापस नहीं आता है, इसलिए नकारात्मक व्यक्तियों के संपर्क में भी नहीं रहना चाहिए और कभी एक बार सकारात्मकता हावी हो जाएगी तो बुरे वक्त में और जब हम निराश होंगे तो वही मन और वही ख्याल हमें दिलासा देगा, क्योंकि हर वक्त कोई हमारे पास रहे यह जरूरी नहीं है लेकिन हां हमारे पास हमारा अंदर का साहस और ईश्वर हमेशा हमारे साथ रहता है इसलिए उस ईश्वर पर भरोसा और उसकी उम्मीद हमें कभी खोना नहीं चाहिए वही हमें दिलासा भी देता है और भरोसा भी देता है और हमारे मनोबल को बनाए रखता है इसलिए जरूरी है है HOPE ….कहते है मन के हारे हार है और मन से जीते तो जीत है , आपको लड़ना ही होगा , आपको जीत के वापिस आना ही होगा, आप आएंगे ये विश्वास भी है औऱ यही विश्वास हमे एक दूसरे को देना है क्योकि हमारी उम्मीद से किसी अपने का भरोसा टिका है, इंतजार कर रहा है आपका …….
क्योकि ,कोई हमसे भी उम्मीद से है