लोकसभा चुनाव से पहले BJP में बड़ा फेरबदल, सह संगठन महामंत्री अतुल राय को हटाया

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भोपाल। विधानसभा चुनाव में हार और लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा में बड़े बदलाव की शुरुआत हो गई है|  बीजेपी लगातार संगठन को मजबूत करने में जुटी हुई है। इसी के चलते लोकसभा चुनाव से पहले संगठन में बड़ा फेरबदल किया गया है। 13 जिलों के अध्यक्ष बदलने के बाद प्रदेश के सह संगठन महामंत्री अतुल राय को भाजपा से हटाकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में वापस भेज दिया है। अतुल राय करीब तीन साल पहले संघ से भाजपा में आए थे। विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा के प्रदेश संगठन में यह पहला बड़ा बदलाव है।  संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में प्रदेश संगठन के कुछ और पदाधिकारियों बाहर का रास्ता दिखा सकता है।

दरअसल, विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही मध्यप्रदेश बीजेपी संगठन में बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही थी। अब तक सह संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे अतुल राय को हटा दिया  गया है।  खबर है कि अतुल राय को हटाए जाने का फैसला बीजेपी संगठन ने मध्य भारत और महाकौशल प्रांत में हार के चलते लिया है। वहीं उनकी जीवनशैली को लेकर भी दबी जुबान में भाजपा के कई नेताओं ने शिकायतें की थी। विधानसभा चुनाव के कुछ टिकट को लेकर भी राय से पार्टी का एक धड़ा खफा था । वहीं यह भी बताया जा रहा है कि अतुल राय ने भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री रामलाल को चिठ्ठी लिखकर संघ में लौटने की इच्छा जताई थी। राय के संघ में वापसी के बाद अभी तक ये तय नही हो पाया है कि उनकी जगह कौन लेगा। दूसरी ओर प्रदेश संगठन मंत्री सुहास भगत के नाम को भी लेकर चर्चाएं जोरों पर है।  

गौरतलब है कि 2017  में मूलत: ग्वालियर के रहने वाले अतुल राय काफी समय से महाकौशल प्रांत के संगठन मंत्री थे।इसके बाद उन्हें सहसंगठन महामंत्री बना दिया गया था, तब से वे यह जिम्मेदारी संभाल रहे थे।लेकिन चुनाव में संगठन के कमजोर प्रदर्शन के चलते बीजेपी में जमकर घमासान मच गया था। केन्द्रीय नेतृत्व और आरएसएस मुखिया तक इसकी शिकायत पहुंची थी कि संगठन महामंत्री और सह संगठन महामंत्री समेत दर्जनों पदाधिकारी बीजेपी विरोधी और बागी नेताओं को मनाने में नाकामयाब रहे है। इसके बाद राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने कमान संभाली थी लेकिन फिर भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। तब से ही संगठन में बदलाव के कयास लगना शुरु हो गए थे, लेकिन मंथन और हार की समीक्षा तक इसे टाल दिया गया था, चुंकी अब लोकसभा चुनाव नजदीक है और पार्टी ऐसे में कोई रिस्क नही लेना चाहती ,इसलिए पहले ही फेरबदल कर दिया। आने वाले दिनों में एक और बड़े बदलाव की संभालवा जताई जा रही है।