भोपाल : सीडीएस जनरल रावत के भाई रिटायर्ड मेजर जनरल के साथ धोखाधड़ी का मामला

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के जवाहर लाल नेहरू कैंसर अस्पताल के अधिकारियों ने रिटायर्ड मेजर जनरल टीपीएस रावत के साथ यह फर्जीवाड़ा किया।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस रहे मेजर जनरल बिपिन रावत के भाई रिटायर्ड मेजर जनरल टीपीएस रावत के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के जवाहर लाल नेहरू कैंसर अस्पताल के अधिकारियों ने रिटायर्ड मेजर जनरल टीपीएस रावत के साथ यह फर्जीवाड़ा किया। दरअसल टीपीएस रावत को अस्पताल का डायरेक्टर नियुक्त कर बिना जानकारी लाखों के चैक पर साइन कराने की कोशिश की। जब टीपीएस रावत ने इसका विरोध किया तो उन्हें पद से हटाकर उनके खिलाफ दुष्प्रचार भी किया। रिटायर्ड मेजर जनरल टीपीएस रावत ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक आर्थिक अपराध ब्यूरो में की है।

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दरअसल टीपीएस रावत का आरोप है कि उन्होंने अक्टूबर 2021 में कैंसर अस्पताल के डायरेक्टर पद पर ज्वॉइन किया था। जल्द ही उन्हें अवांट कैंसर सपोर्ट फाउंडेशन नाम की कंपनी का डायरेक्टर भी बना दिया गया। उन्हे इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह कंपनी अस्पताल द्वारा बनाई गई कंपनी है और अस्पताल की सीईओ का इस पर हाथ है यही कंपनी अस्पताल में दवा सप्लाई का काम करेगी। हालांकि बाद में अस्पताल की सीईओ द्वारा प्रतिदिन लाखों रुपए के चैक पर साइन कराए जाने लगे। जब इनके बारे में जानकारी मांगी तो दिव्या पाराशर ने जानकारी देने से इनकार कर दिया रिटायर्ड मेजर जनरल टीपीएस रावत ने अस्पताल की सीईओ दिव्या पाराशर और उनके पुत्र धनंजय पाराशर पर अस्पताल की आड़ में करोड़ों के फर्जीवाड़े का आरोप लगाया तो उन्हे अस्पताल से बाहर कर दिया गया। रावत का आरोप है कि अस्पताल में हर साल 40 से 50 करोड़ रुपए की दवाओं का इस्तेमाल होता है। पहले यह दवाएं जवाहर मेडिकोस फर्म से खरीदी जाती थीं, लेकिन बाद में धनंजय पाराशर की कंपनी अवांट कैंसर सपोर्ट फाउंडेशन के माध्यम से खरीदी जाने लगीं। सारी खरीदारी फर्जी ईमेल के माध्यम से की जाती है। इसी का विरोध करने पर टीपीएस रावत को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और उन पर ही आरोप लगाकर उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया गया।

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यह कोई पहला मामला नहीं है जब अस्पताल पर इस तरह किसी ने आरोप लगाए हो इससे पहले भी गरीब मरीजों को परेशान करने और उनसे दवाइयों का अतिरिक्त पैसा वसूलने की शिकायते सामने आ चुकी है। अस्पताल मरीजों का हवाला देकर दवा कंपनियों से दवाओं पर भारी डिस्काउंट ले रहा है, लेकिन इसका फायदा मरीजों को देने की बजाय उन्हें प्रिंट रेट पर दवाएं बेची जा रही हैं। यही नहीं अस्पताल में ही नई कंपनी शुरू कर टैक्स चोरी और फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। फिलहाल टीपीएस रावत ने इसकी शिकायत पुलिस में की है।