भोपाल : अब नहीं चलेगी निजी स्कूलों की मनमानी, सांसद साध्वी प्रज्ञा के निर्देश पर बनी समिति

नया सत्र शुरू होने पर समिति के सदस्य स्कूल में जाकर व्यवस्थाओं का मायना करेंगे इस दौरान जरूरत पड़ने पर फायर ऑडिट और पुलिस का भी सहयोग लिया जाएगा बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ स्कूलों में स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है गड़बड़ी करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। 

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। कोरोना महामारी की शुरुआत से ही स्कूलों के गैर-जिम्मेदार रवैये और फीस वसूली की लगातार शिकायतें आ रही थी। शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए भोपाल लोकसभा क्षेत्र की सांसद ने जिला शिक्षा अधिकारी को जांच के लिए निर्देशित किया था। सांसद ने डीईओ को पत्र लिखकर जांच के लिए कहा था।

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भोपाल लोकसभा क्षेत्र की सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थी अभिभावकों की समस्या पर सांसद ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र निजी स्कूलों की जांच करने का निर्देश दिया थे। सांसद के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी भोपाल नई समिति का गठन किया था समिति की अनुशंसा पर स्कूलों के सिलेबस की जानकारी ली गई इसके अलावा सुरक्षा स्वास्थ्य और कक्षा में स्टूडेंट्स की संख्या की स्थिति का जायजा लेने समिति के सदस्य जून में स्कूल पर निर्भर फिजिकल वेरीफिकेशन करेंगे। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि नया सत्र शुरू होने पर समिति के सदस्य स्कूल में जाकर व्यवस्थाओं का मायना करेंगे इस दौरान जरूरत पड़ने पर फायर ऑडिट और पुलिस का भी सहयोग लिया जाएगा बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ स्कूलों में स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है गड़बड़ी करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

इन नंबर कर सकते हैं शिकायत
पैरंट्स इन नंबरों पर शिकायत कर सकते हैं उनकी शिकायतों को गोपनीय रखा जाएगा।
9302766670
9826866968

यह शिकायतें मिली थी 

राजधानी भोपाल में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त 78 स्कूल राजधानी में संचालित हो रहे हैं इनमें पढ़ने वाले बच्चों के पेरेंट्स 146 शिकायतें समिति को मिली हैं। मुख्य शिकायतें हैं, टीसी ना देना, स्कूल की बिल्डिंग में कमर्शियल गतिविधि संचालित होना, एक्स्ट्रा एक्टिविटी के नाम पर फीस वसूलना, स्कूल ड्रेस और किताबों पर तय दुकान पर बिक्री होना, प्रिंट रेट पर किताबों का बेचा जाना एनसीईआरटी की बुक ना पढ़ाना एडमिशन के नाम पर डोनेशन लेना स्कूल के पास धूम्रपान और शराब दुकान संचालित होना, अनावश्यक रूप से बस फीस वसूलना थी।