आग के ढ़ेर पर राजधानी भोपाल, नहीं किसी को कोई सुध

भोपाल।  राजधानी भोपाल के बीचों बीच बने टिम्बर मार्केट की शिफ्टिंग का काम महापौर आलोक शर्मा के साढ़े चार साल से ज़्यादा का कार्यकाल गुज़रने बाद भी पूरा नहीं हुआ है। आग के ढ़ेर पर राजधानी भोपाल लेकिन उसके बावजूद भी निगम व जिला प्रशासन आंख बंदकर हाथ पर हाथ रख बैठा हुआ है। 

महापौर बनते ही  आलोक शर्मा ने भोपाल की जनता से कई वादे किए थे लेकिन उनके कार्यकाल के  लगभग साढे चार साल से ज्यादा गुजरने गए हैं। पर जो वादे थे वो सिर्फ अब वादे ही रह गए हैं। हम बात कर रहे हैं शहर के रिहायशी इलाके के बीचों बीच बने टिम्बर मार्केट की जो कई बार आगजनी की बड़ी घटनाओं का कारण बन चुका है। उसके बावजूद प्रशासन अभी भी किसी बड़े हादसे का इंतेज़ार कर रहा है। भोपाल के बोगदापुल से लेकर भारत टॉकीज़ तक बने इस मार्केट में लकड़ियों के कई बड़े बड़े गोदाम बने हुए है लेकिन वहां किसी भी तरह का आग बुझाने के इंतेज़ाम नहीं है। इससे पहले भी कई बार यह लकड़ियों के गोदाम आग की चपेट में आ चुंके है। उसके बावजूद टिम्बर मार्केट की शिफ्टिंग का काम अभी तक बीच में लटका हुआ है। महापौर आलोक शर्मा से जब मार्केट की शिफ्टिंग के बारे में पूछा तो उनका कहना है कि यह मामला राज्य शासन के स्तर पर है। जगह और सुविधा देने का काम पूरा हो जाएगा तब टिम्बर मार्केट की शिफ्टिंग होगा। महापौर हर बार अपनी जिम्मेदारियों को प्रशासन पर टालते हुए दिखते हैं।

बताया जा रहा है शहर में 120 आरा मशीनें व पीठे संचालित हैं। इनमें से 90 प्रतिशत पीठे व आरा मशीनें पातरा, बरखेड़ी, पुल बोगदा, छोला, भारत टाकीज, छावनी-मंगलवारा,में स्थित हैं जो रिहायशी इलाके है। इनकी शिफ्टिंग की जाती है तो 3 लाख आबादी को रोजाना दिन-रात शोर शराबे, ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण से राहत मिलेगी। इस मामले में निगम आयुक्त बी विजय दत्ता का कहना है कि टिम्बर मार्केट की शिफ्टिंग की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो जाएगी।

गौरतलब है कि पहले हुई प्रशासन की बैठकों में चांदपुर में 18 एकड़ जमीन मार्केट के कारोबारियों को दी गई है। वहां पर 10, 6 और 4 हजार वर्गमीटर के प्लॉट कारोबारियों को आवंटित होंगे। वहां पर 12 एकड़ जमीन डेवलपमेंट के लिए आरक्षित की जाएगी, लेकिन निगम की सुस्ती के कारण 18 एकड़ जमीन पर भी अवैध कब्जा होता जा रहा है। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह कब्जा बढता चला जाएगा। अब देखना यह होगा कि आखिर यह मार्किट कब शिफ्ट होता है और लोगों को सुकून कब मिलता है।