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भोपाल। मध्य प्रदेश में 15 साल सत्ता पर काबिज रही बीजेपी के सामने उम्मीदवारों की तलाश का अभियान अबतक जारी है। पार्टी को इंदौर सीट पर अभी तक उम्मीदवार नहीं मिल रहा है। जबकि, शेष 28 सीटों पर बीजेपी ने प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है। वहीं, कुल 29 में 14 वर्तमान सांसदों के टिकट काटे गए हैं। इनमें से कुछ ने स्वयं ही चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर दिया था। जबकि, कई सांसदों के सिर पर हार की तलवार लटक रही थी। संघ के सर्वे ने बीजेपी की नींद उड़ा दी थी। जिसके बाद उम्मीदवारों को बदला गया। लेकिन विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद बीजेपी अब लोकसभा चुनाव में सतर्क हो गई है। भोपाल सीट पर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को टिटक देने के बाद से पूरे देश में इस बात का संदेश गया है कि बीजेपी हिंदुत्व के मुद्दे पर ही चुनाव लड़ रही है। 

दरअसल, ऐसे पहली बार होगा जब मध्य प्रदेश से बीजेपी के पास कोई ऐसा नेता नहीं है जिसके दम पर पार्टी चुनाव लड़ रही हो। वर्तमान उम्मदीवारों में भी कोई बड़ा नाम सामने नहीं आया है जो जीतने की उम्मीद बांध सके और कांग्रेस उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर देता नजर आए। साध्वी प्रज्ञा के नाम का ऐलान होने से राजनीतिक विश्लेषक हैरान हैं। साध्वी से जीत की उम्मीद करना या उमा भारती का प्रदर्शन दोहराने की अपेक्षा करना नाइंसाफी होगी। उमा भारती भोपाल से एक बार जीत चुकी हैं, लेकिन इस बार उन्होंने चुनाव ही लड़ने से इनकार कर दिया है।

बीजेपी ने इस बार के लोकसभा चुनाव में अपने 26 में से 14 मौजूदा सांसदों को टिकट देने से इनकार कर दिया है। लेकिन उनकी जगह कौन उम्मीदवार बने इसे लेकर उसे पसीने आ रहे हैं। राज्य की इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, विदिशा और खजुराहो जैसी अहम सीटों पर उसके पास कोई राजनीतिक उम्मीदवार है ही नहीं। दरअसल इन सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों की राजनीतिक या प्रशासनिक क्षमता के बजाय आरएसएस की विचारधारा पर ज्यादा भरोसा करती दिख रही है