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भोपाल।

विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी की मुश्किलें कम नही हो रही है। टिकटों को लेकर फिर बीजेपी में घमासान मच गया है। स्थिति यह है कि जिन्हें पार्टी ने जिन्हें टिकट बांटने की जिम्मेदारी सौंपी थीं, अब वही टिकट की मांग करने लगे है। इसके लिए उन्होंने समिति को अपना नाम भी दे दिया है।हालांकि अंतिम फैसला राष्ट्रीय नेतृत्व चुनाव समिति को ही करना है। इसके अलावा बीजेपी के 75  पार फॉर्मूले के यू-टर्न लेने के बाद नेताओं की चुनाव लड़ने की फिर आस जाग गई है। बाबूलाल गौर, राघव जी और रघुनंदन शर्मा जैसे पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी ताल ठोकने से पीछे नही हट रहे है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पार्टी में हड़कंप मच गया है। पार्टी के सामने अपने ही चुनौती बनकर खड़े हो गए है। 

दरअसल, विधानसभा चुनाव में हार के बाद लोकसभा चुनाव में बीजेपी कोई रिस्क नही लेना चाहती। इसके लिए उन्होंने संघ को तो जिम्मेदारी सौंपी ही है साथ ही साथ एक एमपी में चुनाव समिति भी तैयार की है, जिसमें कई बड़े नेताओं को जगह दी गई है। इस समिति से माहौल को देखते हुए हर सीट पर नाम मांगे गए है, लेकिन स्थिति यह हो गई है कि टिकट बांटने वाले नेता खुद ही अपना नाम आगे बढ़ा रहे है। प्रदेश में चुनाव समिति के पचास फीसदी सदस्यों ने टिकट के लिए अपना नाम भी दे दिया है।हालांकि प्रदेश समिति नाम और पैनल बनाकर अंतिम मोहर के लिए केंद्रीय चुनाव समिति को भेजेगी और यह केन्द्रीय समिति,प्रदेश समिति के भेजे गए दावेदारों के पैनल पर आखिरी फैसला लेगी, इसके बाद लिस्ट जारी की जाएगी।

इनके नाम चर्चा में….

 चुनाव समिति में शामिल सदस्यों में प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, जबलपुर, नंदकुमार सिंह चौहान, खंडवा, नरेंद्र सिंह तोमर, ग्वालियर और फग्गन सिंह कुलस्ते शहडोल के टिकट के दावेदार है। इसके अलावा विदिशा से शिवराज सिंह चौहान, गुना से प्रभात झा और कृष्ण मुरारी मोघे के चुनाव लड़ने की चर्चा भी तेज है। कैलाश जोशी, सुहास भगत, सत्यनारायण जटिया, थावरचंद गहलोत, विक्रम वर्मा, राजेंद्र शुक्ला, भूपेंद्र सिंह, माया सिंह और लता एलकर भी चुनाव समिति के सदस्य हैं।

75  पार फॉर्मूल ने भी बढ़ाई मुश्किलें

वही पार्टी द्वारा 75  पार वालों को टिकट देने के फॉर्मूले ने भी नई मुसीबत खड़ी कर दी है। पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व मंत्री के साथ दिग्गज नेताओं को लेकर विधानसभा चुनाव में हारे हुए उम्मीदवारों ने टिकट के लिए ताल ठोंकी है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल ने जहां भोपाल से टिकट मांगा है तो पूर्व वित्त मंत्री राघव जी ने अपने बेटी के लिए विदिशा से टिकट की मांग की है। यहां से शिवराज का भी नाम चर्चा में है, क्योंकि वर्तमान सांसद सुषमा स्वराज ने इस बार लोकसभा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया है।वही वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा ने भी दो चुके शब्दों में कहा है कि टिकट देना ना देना पार्टी का फैसला है मैं किसी के पास याचना लेकर नही जाउंगा।अब प्रदेश चुनाव समिति टिकट को लेकर माथापच्ची कर रही है। खैर दावेदारों के भाग्य का अंतिम फैसला तो केंद्रीय चुनाव समिति को ही करना है।उम्मीद की जा रही है कि जल्द लिस्ट जारी की जा सकती है।