बीजेपी में परिवारवाद: बेटे-बेटियों को टिकट दिलवाने पर अड़े यह नेता

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भोपाल| कांग्रेस पर वंशवाद का आरोप लगाने वाली भारतीय जनता पार्टी में भी अब परिवारवाद हावी है| इसका ताजा उदहारण हालही में हुए विधानसभा चुनाव में देखने को मिला था| जहां वंशवाद के मामले में कांग्रेस को काफी पीछे छोड़ते हुए भाजपा ने कुल उम्मीदवारों में 21 प्रतिशत उम्मीदवार वंशवादी उतारे थे| हालाँकि पार्टी ने विधानसभा चुनाव से पहले  गाइडलाइन बना दी थी कि वंशवाद अब नहीं चलेगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं | हालाँकि कई बड़े नेताओं ने खुद चुनाव नहीं लड़ा, और अपने भाई, बेटे भतीजे को चुनाव लड़ाया | अब लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर नेताओं ने परिजनों को टिकट दिलाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। 

नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव बेटे अभिषेक की दावेदारी सबसे ज्यादा सुर्ख़ियों में है, क्यूंकि जिस सीट से यह दावेदारी कर रहे हैं, वहां से भाजपा के दिग्गज नेता चुनाव लड़ते हैं| अपने बेटे अभिषेक के टिकट के लिए गोपाल भार्गव ने भी हामी भर दी है और उनका कहना है यह उसका हक है टिकट मांगना। गोपाल भार्गव के पुत्र अभिषेक युवा मोर्चा में वे उपाध्यक्ष का पद संभाल रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भी अभिषेक ने दमोह से टिकट मांगा था। 2014 में अरविंद मेनन अभिषेक के टिकट पर सहमत थे पर हाईकमान ने यहां से प्रहलाद पटेल को प्रत्याशी बनाने का फैसला कर दिया। गौरीशंकर बिसेन अपनी बेटी मौसम को लोकसभा चुनाव लड़वाना चाह रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह को विदिशा से टिकट दिलवाने की मुहिम चला रहे हैं। 

यह नेता अपने बच्चों के लिए सक्रिय 

पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन अपनी बेटी मौसम को बालाघाट लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़वाना चाहते हैं। विस चुनाव में वे खुद और बेटी के लिए दो टिकट मांग रहे थे, लेकिन सांसद बोधसिंह भगत के विरोध और पार्टी लाइन के कारण सफल नहीं हो पाए। अब बिसेन समर्थक मौसम के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। वहीं  चित्रकूट में पंडित दीनदयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष भरत पाठक की पत्नी नंदिता पाठक भी खजुराहो से टिकट की दौड़ में हैं। 2018 में हुए चित्रकूट उपचुनाव में भी नंदिता की दावेदारी उभरी थी। इस सीट के सांसद नाग्रेंद्र सिंह को पार्टी ने विधानसभा चुनाव में उतारा था और वे जीत भी गए हैं। सागर के सांसद लक्ष्मीनारायण यादव के पुत्र सुधीर यादव को भी सुरखी से टिकट इसी शर्त के साथ दिया गया था कि वे खुद के लिए सागर से टिकट की दावेदारी नहीं करेंगे। पार्टी सागर से प्रत्याशी बदलना चाहती है पर अब यादव फिर एक बार टिकट की दौड़ में सक्रिय हो गए हैं। उनका कहना है कि पार्टी के पास अभी उनका विकल्प नहीं है| 

विधानसभा यह सफल हुए 

विधानसभा चुनाव में नेता पुत्रों को टिकट देने में भाजपा ने सख्त रवैया अपनाया था। लेकिन इसके बाद भी कई नेता पुत्रों को टिकट मिला| पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर को पार्टी ने इस शर्त के साथ टिकट दिया था कि वे खुद के लिए टिकट नहीं मांगेगे। इसी तरह पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश को भी पार्टी ने अंतिम क्षणों में प्रत्याशी बनाया था। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के पुत्र भी राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिल पाया।