MP: स्टिंग ऑपरेशन में फंसे भाजपा सांसद, वीडियो वायरल, मचा बवाल

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भोपाल।

लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रही है। अब केंद्र सरकार में मंत्री रहे मंडला से भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। एक निजी टीवी चैनल ने उनके स्टिंग ऑपरेशन का खुलासा किया है, जिसमें वे 2014 के लोकसभा चुनाव में लगभग 10 करोड़ रुपए खर्च करने और 2019 के चुनाव में भी करोड़ों रुपए तक खर्च आने की बात करते हुए दिखाए दे रहे है।सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।वीडियो के वायरल होने पर भाजपा में भूचाल मच गया है। बता दे कि भाजपा ने एक बार फिर भरोसा जताते हुए कुलस्ते को लोकसभा का टिकट दिया है।

दरअसल, दो दिन पहले एक निजी चैनल द्वारा कुछ सांसदों का चुनाव खर्च को लेकर स्टिंग ऑपरेशन कर प्रसारण किया गया था।जिसमें मध्यप्रदेश के मंडला लोकसभा सीट के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का भी नाम शामिल है। जिसमें  कुलस्ते को 2014 के लोकसभा चुनाव में लगभग 10 करोड़ रुपए खर्च करने और 2019 के चुनाव में भी करोड़ों रुपए तक खर्च आने की बात करते हुए दिखाया गया है।जबकि चुनाव आयोग द्वारा चुनाव खर्च की सीमा 70 लाख ही तय की गई है। । वहीं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव ने कहा कि शिकायत आई तो परीक्षण कराएंगे। अब इसका यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है, इधर कांग्रेस ने इस मुद्दे को लपकते हुए चुनाव आयोग से शिकायत करने की बात कही है।वही बीजेपी में वीडियो के वायरल होने के बाद से बाद बवाल मच गया है।भोपाल से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरु हो गया है।

कुलस्ते ने ये ख़ुलासा भी किया कि लोकसभा चुनाव में वोटर और सपोर्टर दोनों को शराब के सुरूर में डुबोने के लिए वो लाखों रुपये का काला धन बहा देते हैं. अब जरा सोचिए, चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा 70 लाख है, लेकिन कुलस्ते साहब खुद ही बता रहे हैं कि 25–30 लाख रुपये तो सिर्फ समर्थकों, कार्यकर्ताओं और वोटर्स को शराब पिलाने में खर्च कर देते हैं. इसी कड़ी में बीजेपी सांसद कुलस्ते ने बताया कि कैसे वो चुनाव के दौरान काले धन को किस्तों में ख़र्च करते हैं, ताकि कहीं कोई गड़बड़ी ना हो सके।

सांसद का दावा है कि पिछले आम चुनाव में यानि 2014 में इन्होंने 12 करोड़ रुपए खर्च किए। सिर्फ रैलियों पर 2 करोड़ से ज्यादा उड़ा दिए। चुनाव प्रचार के लिए गाड़ियों में, विरोधियों के वोट काटने के लिए उम्मीदवार खड़े करने में, मतदाताओं में शराब बांटने में करोड़ों की ब्लैकमनी उड़ा दी। वो कम से कम 10 करोड़ ख़र्च करके आराम से चुनाव लड़ते हैं, जबकि चुनाव आयोग ने ख़र्च की अधिकतम सीमा 70 लाख रुपये तय की है। मतलब ये कि पिछले लोकसभा चुनाव में कुलस्ते साहब ने तय सीमा से 14-15 गुना ज्यादा खर्च किया।

बता दे कि यह पहला मौका नही है जब कुलस्ते यूं विवादों में घिरे हो। इसके पहले कुलस्ते जब 1999 से वाजपेयी मंत्रालय में राज्य मंत्री थे। वोट फॉर नोट कांड में नाम आने के बाद वह कई दिनों तक सूर्खियों में छाए रहे। संसद के अंदर उन्होंने भी नोट की गड्डियां लहराई थीं।