नेता प्रतिपक्ष भार्गव के बयान से खफा शीर्ष नेतृत्व, पार्टी नेताओं को किया तलब

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भोपाल।  मध्य प्रदेश की सियासत में लगातार उठापटक जारी है। हाल ही में राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने विशेष सत्र बुलाने और राज्य में अल्पमत सरकार होने का दावा किया था। इस पूरे मामले में राष्ट्रीय स्तर तक सुर्खिया बटोरी। लेकिन नेता प्रतिपक्ष का यह दावं उलटा पड़ता नजर आ रहा है। हाईकमान ने उनके इस रवैया पर नाराजगी जाहिर की है। 

दरअसल, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने प्रदेश में विकराल समस्यों के समाधान के लिए विशेष सत्र बुलाने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा था। साथ ही इस तरह के बयान भी सामने आए थे कि कमलनाथ सरकार बहुमत एक बार फिर विधानसभा में पेश करे। जिसे लेकर मंगलवार को प्रदेश की सियासत गर्मा गई। भार्गव के इस तरह के कदम पर राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के अंदर आलोचना हुई है।  हाईकमान ने गोपाल भार्गव व मध्यप्रदेश भाजपा संगठन से नाराजगी जाहिर की है। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने मध्यप्रदेश भाजपा से यह सवाल पूछा है कि क्या भार्गव ने ऐसा करने से पहले संगठन को अपने विश्वास में लिया था। हाल ही में लोकसभा चुनाव संपन्न हुए हैं। ऐसे में पार्टी हाईकमान केंद्र में सरकार बनाने की कवायद में व्यस्त है। इस तरह नतीजों से पहले राज्य में सरकार को अल्पमत बताना से जनता में इस का संकेत गलत गया है। इस तरह कांग्रेस भी सतर्क हो गई है। बीजेपी शीर्ष नेतृत्व का कहना है कि बिना विधायक दल की बैठक बुलाए यह बयान क्यों दिया? ऐसी तमाम बातों को लेकर हाईकमान ने प्रदेश संगठन से अपनी नाराजगी जाहिर की है।    

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने क्या दिया आलाकमान को जवाब? 

मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने इस पुरे मामले को लेकर सफाई पेश करते हुए भार्गव द्वारा सिर्फ सत्र बुलाने को पत्र लिखे जाने की बात कही है, साथ ही यह भी कहा है की पत्र का फ्लोर टेस्ट से कोई लेना देना नहीं है। राकेश सिंह के अनुसार नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को यह कहते हुए पत्र लिखा था कि सदन में कई ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा के लिए पत्र लिखकर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का आग्रह किया गया था। लेकिन मीडिया ने उसे तोड़ मरोड़ के पेश किया। भाजपा सूत्रों के अनुसार नेता प्रतिपक्ष के पत्र की भाषा सिर्फ सत्र बुलाए जाने तक सीमित थी, परन्तु उन्होंने मीडिया में जो अलग-अलग बयान दिए, उसका संदेश यही था कि भाजपा मप्र में कमलनाथ सरकार गिराना चाहती है।