प्रदेश के किसानों को खून के आंसू रुला रही है कमलनाथ सरकार: राकेश सिंह

भोपाल। मध्यप्रदेश को केंद्र से पर्याप्त यूरिया मिला है और राज्य सरकार के पास यूरिया का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। लेकिन कमलनाथ सरकार तबादला उद्योग, रेत नीति और शराब नीति से ही फुरसत नहीं मिली और वह यूरिया का प्रबंधन सही तरीके से नहीं कर पाई। अब प्रदेश के किसान एक एक बोरी खाद के लिए परेशान हो रहे हैं। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद राकेश सिंह ने दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार भाजपा नेताओं पर झूठे आरोप लगाकर प्रदेश की जनता को बरगलाने की कोशिश कर रही है।

14 दिसंबर को खेत धरना देगी भाजपा

सिंह ने कहा कि प्रदेश में जब से कमलनाथ सरकार बनी है, पूरे प्रदेश में जनता के साथ छल हो रहा है। सरकार के छल का सबसे बड़ा शिकार अन्नदाता किसान हो रहा है। ना कर्ज माफ हुआ, ना फसलों का मुआवजा मिला और अब यूरिया के लिए लाठियां खाना पड़ रही हैं। कमलनाथ सरकार की किसान विरोधी नीतियों एवं यूरिया की वर्तमान किल्लत को लेकर भारतीय जनता पार्टी 14 दिसंबर को पूरे प्रदेश में खेत धरना आयोजित करेगी। मंडल स्तर पर आयोजित किए जाने वाले इस धरने में किसानों के साथ पार्टी के कार्यकर्ता और जन प्रतिनिधि शामिल होंगे।

मध्यप्रदेश में हो रही किसानों की दुर्दशा

राकेश सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में किसानों की स्थिति बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। वह राज्य जिसको भाजपा सरकार के समय कृषि कर्मण पुरस्कार मिलता रहा है। आज उस राज्य में किसानों की दुर्दशा हो रही है। किसानों से दुव्र्यहार किया जा रहा है, झूठ बोला जा रहा है। कांग्रेस ने पहले कहा कि किसानों का 2 लाख रूपए तक का कर्जमाफ करेंगे, जो नहीं किया। भीषण बारिश के बाद मुआवजे का आश्वासन दिया, सर्वे तक नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने 1 हजार करोड़ की राशि भेजी और 900 करोड़ रूपए पहले से आपदा प्रबंधन के मद में कमलनाथ सरकार के पास थे। लेकिन किसानों को 900 रूपए भी नहीं बांटे गए। पता नहीं कमलनाथ सरकार ने उस पैसे का क्या किया।

सरकार के कुप्रबंधन की सजा भुगत रहा किसान

सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने यूरिया को नीम कोटेड करके देश से किल्लत और कालाबाजारी समाप्त कर दी थी। लेकिन प्रदेश सरकार के कुप्रबंधन के कारण किसान यूरिया के लिए लाठियां खा रहा है। 250 रुपए की बोरी 400 से 500 रूपए में मिल रही है। ऊपर से किसानों को डीएपी खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जबकि उन्हें आवश्यकता नहीं है। यूरिया की कालाबाजारी शुरू हो गई है और पूरा वितरण तंत्र कालाबाजारी करने वालों के हाथ में चला गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के पास 27 हजार मैट्रिक टन यूरिया मौजूद था, लेकिन उसके वितरण का कोई प्रबंधन नहीं किया। 15 लाख टन यूरिया केन्द्र ने और देना तय किया। इसके अलावा 75 हजार टन अतिरिक्त देने जा रही ह, लेकिन दुर्भाग्य से मध्यप्रदेश सरकार इसका प्रबंधन नहीं कर पा रही है।