राजनैतिक सरगर्मियों के बीच बसपा विधायक ने की ये मांग, टेंशन में सरकार

भोपाल।
सियासी उठापटक के बीच कथित तौर पर बंधक बनाए गए बसपा विधायक संजीव सिंह कुशवाहा का बड़ा बयान सामने आया है।इस हाईवोल्टेज ड्रामे के बीच संजीव ने पार्टी से राज्यसभा भेजे जाने की मांग की है। कुशवाह का कहना है कि राज्यसभा की एक सीट बसपा को मिलना चाहिए। बसपा कांग्रेस सरकार को बिना शर्त समर्थन दे रही है इसलिए कांग्रेस की नेतिक जिम्मेदारी है कि वह बसपा के किसी नेता को राज्यसभा भेजें। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और दिग्गज नेता सिंधिया के राज्यसभा जाने की अटकलों के बीच बसपा विधायक की इस मांग ने पार्टी की टेंशन बढा दी है।एक के बाद एक सरकार में असंतोष उभरकर सामने आ रहा है।वही विपक्ष के साथ साथ अपने भी दिग्विजय पर आरोप भी लगा रहे है कि ये सारा खेल उन्होंने राज्यसभा जाने के लिए खेला था।

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि, चार विधायक अब भी ऐसे है जो दिल्ली और बेंगलुरू में है। इनमें कांग्रेस के बिसाहूलाल सिंह, हरदीप सिंह डंग व रघुराज कंसाना और निर्दलीय सुरेंद्र सिंह शेरा शामिल हैं। इन सभी विधायकों के दोपहर बाद तक चार्टर प्लेन से दिग्विजय सिंह के साथ भोपाल पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि, चार विधायक अब भी ऐसे है जो दिल्ली और बेंगलुरू में है। इनमें कांग्रेस के बिसाहूलाल सिंह, हरदीप सिंह डंग व रघुराज कंसाना और निर्दलीय सुरेंद्र सिंह शेरा शामिल हैं। इन सभी विधायकों के दोपहर बाद तक चार्टर प्लेन से दिग्विजय सिंह के साथ भोपाल पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

कांग्रेस के लिए छह विधायकों की बुधवार की शाम को हुई वापसी काफी राहतभरी रही। दिल्ली से चार्टर प्लेन से बसपा की राम बाई, संजीव सिंह कुशवाहा, सपा के राजेश शुक्ला, कांग्रेस के एदल सिंह कंसाना, रणवीर जाटव व कमलेश जाटव लौटे थे। इन विधायकों की कई घंटे तक मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ बैठक चली, इस मौके पर प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया भी मौजूद थे।

बता दे कि 26 मार्च को राज्यसभा चुनाव होना है। दिग्विजय सिंह की राज्‍यसभा सीट का कार्यकाल खत्‍म हो रहा है और मध्‍य प्रदेश में 3 सीटों पर राज्‍यसभा चुनाव होने हैं। इनमें से 2 सीटों पर कांग्रेस आसानी से जीत सकती है। सूत्रों के मुताबिक, कमलनाथ सरकार के ‘संकटमोचक’ बनने के बाद दिग्विजय ने कांग्रेस आलाकमान से डील की है, जिसके तहत सरकार बचाने के एवज में उन्हें फिर से राज्यसभा भेजा जा सकता है।वही सिंधिया के राज्यसभा जाने की अटकलें है, इसी बीच बसपा ने मांग उठाकर पार्टी को चिंता में डाल दिया है। देखना अब दिलचस्प होगा कि इस सियासी संकट से कमलनाथ सरकार और कांग्रेस कैसे उभर पाती है।