कमलनाथ ने मांगा दीपक जोशी का साथ, क्या थामेंगे ‘हाथ’..?

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| मध्य प्रदेश (MadhyaPradesh) में 28 सीटों पर उपचुनाव (Byelection) होने हैं, इनमे से 25 सीटों पर कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद दोबारा चुनाव की स्थिति बनी है| हालांकि दल बदल का दौर अभी थमा नहीं है| कांग्रेस (Congress) भी भाजपा (BJP) के असंतुष्ट नेताओं पर नजर गड़ाए बैठी है| भाजपा की पूर्व विधायक पारुल साहू के बाद अब कमलनाथ (Kamalnath) पूर्व मंत्री दीपक जोशी (Deepak Joshi) को कांग्रेस में लाना चाहते हैं| एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ से ख़ास चर्चा में दीपक जोशी ने खुलासा किया है कि कमलनाथ ने उन्हें कांग्रेस में लाने की इच्छा जताई है, हालांकि उन्होंने समय आने पर निर्णय लेने की बात कही है|

वीरेंद्र शर्मा से खास चर्चा में पूर्व मंत्री दीपक जोशी बदलते परिदृश्य में भाजपा की भूमिका से भी असहज नजर आये| कांग्रेस छोड़ भाजपा में आये पूर्व विधायकों को लेकर दीपक जोशी ने कहा कि यह पार्टी का निर्णय है जो स्वीकार है, लेकिन पार्टी को कार्यकर्ताओ को विश्वास में लेना चाहिए था| एक कार्यकर्ता के नाते पार्टी का निर्णय मानना मेरा कर्तव्य है|

पूर्व मंत्री जोशी ने बताया कि वो राजनीति में सिर्फ मेरे परिवार या पिताजी के कारण नहीं आये| उन्होंने कहा कि मैं छात्र राजनीति से सक्रिय हु, जब मुझे जनसंघ नेता के कारण मुझे चांटे पड़े थे और मेरी कॉलर खींचकर बटन तोड़ दिए गए थे, तब मैंने यह तय किया था कि इस हमीदिया कॉलेज में मैं कुछ मुकाम हासिल करूँगा| सबके सहयोग से मेने छात्र संघ का चुनाव जीता और लगातार छात्र राजनीति में सक्रिय रहा| वर्तमान में मध्य प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य जो देखने में आ रहा है उसमे नेताओं की भाषाशैली है वो अमर्यादित है, राजनीति में एक दूसरे का विरोध हो लेकिन जिस तरह की बात आज की जा रही है वो ठीक नहीं|

नाराजगी की खबरों पर पूर्व मंत्री ने कहा कि कांग्रेस छोड़ आये पूर्व विधायकों को लेकर पार्टी को कार्यकर्ताओं से बात करनी थी, लेकिन यह चूक हुई है| लेकिन भाजपा में एक सिस्टम है कि पोलिंग बूथ से लेकर राष्ट्रिय अध्यक्ष तक बात की जा सकती है| इस प्रक्रिया पर मेरा विश्वास कायम है और मुझे भी बात रखने का मौक़ा मिला| मैं पदों के पीछे भागने पर विश्वास नहीं करता हूँ| जय को और पराजय को भी स्वीकार किया है| अटल जी ने एक सीट के लिए समझौता करने से इंकार कर दिया था| लेकिन आज का परिदृश्य बदल गया है|

पार्टी छोड़ने के विचार पर कहा कि मैं पद पर रहूँगा तो ही काम करूंगा, ऐसा मेने कभी नहीं माना| लेकिन हमारे लोग जिन्होंने पार्टी के लिए काम किया है, एक दम हर घर बैठ जाएंगे तो वो भी ठीक नहीं रहेगा| जनसंघ, बीजेपी के विचारों को संरक्षण देना का, उन कामों को करने की ताकत हमारे पास होनी चाहिए| अभी मैं भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहा हूँ, मेरा नाम दीपक है, जो जनसंघ की छाप हुआ करती थी, पार्टी छोड़ने जैसा निर्णय मेरे लिए बड़े दुर्भाग्य की बात होगी| अगर ऐसी स्थिति बनती है तो यह मेरे लिए बहुत मुश्किल होगा|

 

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