एमपी में कर्मचारियों को जल्द मिल सकता है क्रमोन्नति का लाभ

भोपाल।
प्रमोशन में आरक्षण के फेर में उलझे कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है।सामान्य प्रशासन मंत्री डॉक्टर गोविंद सिंह ने कर्मचारियों के हित में बड़ा बयान दिया है। गोविंद सिंह का कहना है कि सरकार भले कर्मचारियों को प्रमोशन नहीं दे सकती लेकिन उन्हें आईएएस-आईपीएस की तरह क्रमोन्नति का लाभ दिया जा सकता है। इसके लिए मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दे दी है।

शनिवार को जबलपुर पहुंचे सामान्य प्रशासन मंत्री डॉक्टर गोविंद सिंह कहा कि सरकार भले कर्मचारियों को प्रमोशन नहीं दे सकती लेकिन उन्हें आईएएस-आईपीएस की तरह क्रमोन्नति का लाभ दिया जा सकता है।कर्मचारियों को क्रमोन्नति का लाभ देने का प्रस्ताव सीएम कमलनाथ को भेजा था जिस पर मुख्यमंत्री ने विचार करने के लिए एक कमेटी का भी गठन कर दिया है।प्रदेश के मुख्य सचिव को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है जो इस प्रस्ताव पर फैसला लेंगे। सरकार इसके लिए विधि विभाग से कानूनी राय भी लेगी और फिर जल्द ही प्रदेश के कर्मचारियों को क्रमोन्नति का लाभ दिया जाएगा।

वही उन्होंने एक और बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि सरकार 31 मार्च को 62 वर्ष की आयु पूरी करके रिटायर हो रहे कर्मचारियों को किसी तरह का एक्सटेंशन नहीं देगी, यहां कोई वित्तीय स्थिति की बात नहीं है, बल्कि रोज़गार देने पर फोकस किया जा रहा है। शिवराज सरकार में रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 किए जाने से युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा था। सरकार का ज़ोर उनकी जगह प्रदेश के नौजवानों को रोज़गार देने पर होगा।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक ‘राज्य सरकार आरक्षण देने को बाध्य नहीं है। पदोन्नति में आरक्षण का दावा कोई मौलिक अधिकार नहीं है। यह पूरी तरह से राज्य सरकारों के विवेक पर निर्भर है कि उसे एससी और एसटी को आरक्षण या पदोन्नति में आरक्षण देना है या नहीं। इसलिए राज्य सरकारें इसको अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए बाध्य नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद जमकर सियासत हो रही है। कई मंत्री-विधायक और सांसद इसके विरोध में उतर आए है। वही मांग की जा रही है कि केन्द्र की मोदी सरकार कोर्ट के फैसले को बदलने संसद में कोई अध्यादेश लाए ताकी इसमें सुधार किया जा सके।