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भोपाल।  मध्यप्रदेश में भाजपा की शेष रह गई 8 लोकसभा सीटों के प्रत्याशियों को लेकर हाईकमान द्वारा मंथन जारी है। माना जा रहा है कि इन नामों की घोषणा कभी भी की जा सकती है। इस मंथन के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। दिल्ली में उन्होंने भाजपा नेतृत्व के साथ शेष रह गई 8 लोकसभा सीटों के प्रत्याशियों को लेकर चर्चा की।

भोपाल लोकसभा सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के मैदान में उतरने एवं इंदौर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के रुख के कारण भाजपा को इन दोनों सीटों पर प्रत्याशी तय करने में पसीना आ रहा है.इसके अलावा पार्टी गुना में ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं रतलाम-झाबुआ में कांतिलाल भूरिया के मुकाबले के लिए भी प्रत्याशी तय नहीं कर पा रही। विदिशा में अब तक केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज का उत्तराधिकारी नहीं ढूंढा जा सका। इस सारी सीटों के लिए प्रत्याशी तय करने में भाजपा नेतृत्व को खासा कसरत करना पड़ रही है। इनके अलावा धार, खजुराहो एवं सागर के प्रत्याशी भी अब तक घोषित नहीं हुए हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि एक-दो दिन में शेष बची 8 सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित किए जा सकते हैं।

सागर, खजुराहो एवं धार में नए चेहरे संभव

जो सीट बची है उनमें तीन सीटें सागर, खजुराहो एवं धार के सांसदों का फिर मैदान में न उतरना तय माना जा रहा है। सागर के सांसद लक्ष्मीनारायण यादव का टिकट कटना तय है। वे 75 उम्र सीमा के दायरे में है और उनके बेटे सुधीर यादव के लिए लांबिग कर रहे हैं। सुधीर सुरखी में विधानसभा का चुनाव हारे हैं। यहां से नया नाम पूर्व विधायक पारुल साहू का भी चल रहा है। गोपाल भार्गव अपने बेटे को लेकर शांत हो गए है। खजुराहो सांसद नागेन्द्र सिंह अब विधायक बन गए हैं। उनके स्थान पर यहां से भाजपा ललिता यादव, विजय बहादुर सिंह यादव एवं नंदिता पाठक सहित कई नामों पर विचार कर रही है। धार से इस बार सावित्री ठाकुर का टिकट कटना तय माना जा रहा है।

विदिशा सीट पर शिवराज की नजर

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विदिशा लोकसभा सीट छोडऩा नहीं चाहते खुद लोकसभा का चुनाव लडऩा भी नहीं चाहते। वे पत्नी साधना सिंह को यहां से टिकट चाहते हैं। इसके लिए उनके खास रामपाल सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर सुषमा स्वराज एवं अन्य नेताओं से मुलाकात भी कर चुका है। विदिशा से पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, राघवजी अपने बेटे ज्योति के लिए भी टिकट चाहते हैं। वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा भी यहां से दावेदार हैं।

गुना-रतलाम में मुश्किल

गुना कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की सीट है, जहां प्रचार अभियान का जिम्मा उनकी पत्नी प्रियदर्शनीय राजे ने संभाल रखा है। भाजपा यहां अपने अधिकांश चेहरे आजमा चुकी है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली। इस प्रकार रतलाम में पिछली बार जीत दर्ज करने वाले दिलीप सिंह भूरिया का स्वर्गवास हो चुका हैं और उप चुनाव में कांतिलाल भूरिया ने उनकी बेटी निर्मला भूरिया को हराकर फिर यह सीट छीन ली थी। भाजपा को इन दोनों सीटों पर जीतने की क्षमता वाले प्रत्याशी नहीं मिल रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान के साथ दिल्ली में इन दोनों सीटों पर भी चर्चा हुई और कोई बड़ा चेहरा उतारने पर विचार हुआ।