Chitrakoot-kidnapping-case-action-may-be-against-sp-and-ig-

भोपाल। सतना जिले के चित्रकूट से दो जुड़वा भाईयों के अपहरण और हत्या की घटना से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में पुलिस महानिदेशक वीके सिंह की ओर से घटना से जुड़ी रिपोर्ट मिलने के बाद सतना पुलिस अधीक्षक, रीवा रेंज आईजी समेत कई पुलिस अधिकारियों पर तबादले की गाज गिर सकती है। बच्चों के परिजनों ने पुलिस पर अपराधियों को संरक्षण देने एवं लापरवाही के आरोप लगाए हैं। इधर मुरैना में कांग्रेस नेेता के बेटे पर प्रकरण दर्ज करने के बाद चर्चा में आए एसपी रियाज इकबाल को सरकार ने हटा दिया है। अब सरकार पर सतना अपहरण कांड में पुलिस अफसरों को हटाने का दबाव बढ़ गया है। 

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने चित्रकूट अपहरण कांड में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर पुलिस महानिदेशक से रिपोर्ट तलब की थी, संभवत: अपहरण कांड से जुड़ी रिपोर्ट आज मुख्यमंत्री तक पहुंच सकती है। ऐेसे में स्थानीय लोगों में पुलिस एवं सरकार के खिलाफ बढ़ती नाराजगी को देखते हुए राज्य सरकार सतना पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह गौर, रीवा रेंज आईजी चंचल शेखर, समेत बच्चों की तलाश में जुटे थाना प्रभारी एवं डीएसपी स्तर के अधिकारियों को हटाने का फैसला ले सकती है। हालांकि पीडि़त परिवार ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और घटना की सीबीआई जांच की मांग की है। 

उल्लेखनीय है कि चित्रकूट के सदगुरु पब्लिक स्कूल में पढऩे वाले जुड़वा भाई श्रेयांश और प्रियांश का 11 फरवरी को दिनदहाड़े अपहरण कर लिया था। परिजनों की ओर से 20 लाख की फिरौती भी दी गई, लेकिन 24 फरवरी को दोनों बच्चों के शव उप्र में यमुना किनारे से बरामद हुए। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इस घटना के बाद परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। 

मुरैना एसपी को हटाने पर शिवराज ने किया हमला 

मुरैना एसपी रियाज इकबाल के तबादले को लेकर कमलनाथ सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि पिछले हफ्ते मुरैना पुलिस ने कांग्रेस विधायक ऐंदल सिंह कंषाना के बेटे पर केस दर्ज किया था। रियाज के तबादले पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट के जरिए कमलनाथ सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा कि ‘कांग्रेस नेता प्रदेश में हो रही हर आपराधिक घटना के लिए भाजपा को दोष देते हैं, जबकि स्वयं विधायक पुत्र कानून से खिलवाड़ करते फिर रहे हैं। अपने नेताओं को समझाना तो दूर, जिस अधिकारी ने ईमानदारी से अपना काम किया उसे ही सरकार ने हटा दिया। वाकई में यही है ”वक्त बदलाव का”