राजनीति के धुरंधरों में टकराव, टिकट कटवाने भी लगा रहे जोर

clash-between-senior-leaders-for-loksabha-election-tickets

भोपाल। मध्य प्रदेश में छह माह के भीतर दूसरी बार चुनाव लड़ने के लिए जमकर उठापटक देखने को मिल रही है| एक तरफ जहां नेता अपने लिए टिकट के लिए जोर आजमाइश में जुटे हुए हैं, तो वहीं दूसरी और टिकट कटवाने वालों की भी लम्बी फेहरिस्त है| कांग्रेस में उम्मीदवारों पर अंतिम दौर में मंथन चल रहा है| लेकिन टिकट के लिए कांग्रेस नेताओं में आपसी टकराव भी सामने आ रहे हैं| ऐसी स्तिथि विधानसभा चुनाव में भी सामने आई थी| करीब आधा दर्जन सीटों पर ऐसे दावेदार सामने आए हैं, जिनमें जबर्दस्त प्रतिस्पर्धा नजर आ रही है। कुछ दावेदारों के खिलाफ ऐसे भी नेता लगे हैं, जिन्हें वे टिकट नहीं दिलाने के लिए जुटे हैं और कुछ नेता एक- दूसरे का टिकट कटवाने की कोशिशें कर रहे हैं। एक नेता के खिलाफ दूसरे नेता अन्य की लॉबिंग कर रहे हैं| भोपाल से दिल्ली तक इसकी चर्चा है| 

होशंगाबाद, ग्वालियर, सतना, खंडवा, शहडोल समेत कई सीटों पर यह स्तिथि बनी हुई है| होशंगाबाद सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा और पूर्व विधायक सविता दीवान की प्रमुख दावेदारी है। तीनों नेता हार का सामना कर चुके हैं| पचौरी हाल ही में विधानसभा चुनाव हारे हैं और नीखरा लोकसभा और दीवान पूर्व में विधानसभा में पराजित हो चुकी हैं। पचौरी और नीखरा टिकट पाने के लिए क्षेत्र और संगठन में तेजी से सक्रिय हैं। दोनों ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता है और पचौरी तो हर चुनाव में दावेदार के रूप में सामने आते हैं| हालाँकि वे टिकट मिलने के बाद कभी पार्टी को जीत नहीं दिला सके| 

मामा भांजे में टकराव 

ऐसे ही स्तिथि सतना लोकसभा सीट पर भी सामने आई है, जहां कड़ी प्रतिस्पर्धा देखि गई है| यहां मामा भानजे राजेंद्र सिंह-अजय सिंह टिकट पाने के लिए टक्कर में है| दोनों नेता क्षेत्र में सक्रिय हैं, लेकिन राजेंद्र सिंह बाहरी प्रत्याशी बताकर अजय सिंह का दबे स्वरों में विरोध कर रहे हैं। हकीकत यह है कि अजय सिंह 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद मात्र 8000 वोटों के मामूली अंतर से हार को आधार बनाकर यहां से दावा ठोक रहे हैं। अजय सिंह लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका गंवाना नहीं चाहते, इसलिए वे दिल्ली की दौड़ भी लगा रहे हैं। लेकिन चर्चा है कि पार्टी उन्हें सीधी से चुनाव लड़ाएगी| इसके अलावा खंडवा लोकसभा सीट पर भी हाई वोल्टेज ड्रामा चल रहा है| क्यूंकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव की संभावित उम्मीदवारी को देखते हुए कई स्थानीय नेता उनका टिकट कटवाने की कोशिश कर रहे हैं। निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा भी उनकी पत्नी के लिए दावेदारी ठोक रहे हैं|  कहा जाता है कि यादव ने विधानसभा चुनाव 2018 में जिन क्षेत्रीय नेताओं के टिकट कटवाने की कोशिशें की थीं, वे अभी से क्षेत्र में सक्रिय हो गए हैं। लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाए जाने की स्थिति में उन्हें न केवल भाजपा, बल्कि अपने दलों के कुछ नेताओं से भी अप्रत्यक्ष रूप से जूझना पड़ेगा।

शहडोल सीट पर विवाद की स्तिथि बनी हुई हैं| यहां उपचुनाव हारी हिमाद्री सिंह का नाम सामने आते ही क्षेत्रीय नेता सक्रिय हो गए हैं। विधायक फुंदेलाल मार्को ने तो रायशुमारी के दौरान हिमाद्री का विरोध किया था। हिमाद्री सिंह के पति भाजपा में हैं, विधानसभा चुनाव में उनके आरोप लगे। अब उन्हें लोकसभा में प्रत्याशी बनाए जाने से रोकने के लिए क्षेत्रीय कांग्रेस नेता एकजुट दिखाई दे रहे हैं, जबकि लोकसभा उपचुनाव में उन्हें जिताने के लिए सभी ने काम किया था। इसके अलावा ग्वालियर में भी रोचक प्रतिस्पर्धा चल रही है| जहां लगातार दो बार से लोकसभा चुनाव हार रहे अशोक सिंह फिर से प्रयास कर रहे हैं। वहीं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया या उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी राजे के चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं| दोनों ही स्तिथि में अशोक सिंह की टिकट संकट में है, लेकिन कई बड़े नेता अशोक सिंह के लिए लॉबिंग कर रहे हैं|