64 लाख का मेला प्रशासन ने 10 लाख में करा दिया, मुख्यमंत्री ने सराहा

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भोपाल | मध्यप्रदेश के ���ोशंगबाद जिले में प्रशासन ने खर्चीले सरकारी आयोजन में लाखों की कटौती कर गुड गर्वनेस की एक बड़ी मिसाल पेश की है। यहां प्रशासन ने 64 लाख रु. में होने वाला नागपुरी मेला 10 लाख रु. में करवा दिया।  नाेडल अधिकारी व जिपं सीईओ आदित्य सिंह (आईएएस) ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वे पूरे समय यहां डटे रहे और एक-एक पाइंट की निगरानी करते रहे। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पूरी टीम को बधाई दी है, वहीं प्रशासन के इस काम के लिए सराहना भी की है| 

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर लिखा, होशंगाबाद जिले में सरकारी नागद्वारी मेले के आयोजन में ज़िला प्रशासन ने वर्षों से हो रहे अनावश्यक व्यय पर रोक लगाकर, ख़र्च  प्रबंधन से इस वर्ष लाखों की बचत कर गुड गवर्नेंस की मिसाल पेश की है। सरकार का लक्ष्य है फ़िज़ूलख़र्ची ,भ्रष्टाचार व गड़बड़ी को रोकना, जनता के एक-एक पैसे का सदुपयोग  हो ,उस दिशा में किया यह कार्य प्रशंसनीय व दूसरों के लिये प्रेरक। प्रशासन की पूरी टीम को बधाई।

दरअसल, हर साल नागपंचमी पर पचमढ़ी में नागद्वारी मेला लगता है। सतपुड़ा की पहाड़ियों में बेहद दुर्गम स्थान पर नागद्वार स्वामी का मंदिर हैं। संतान उत्पत्ति के साथ ही संतान संबंधी परेशानी को लेकर लोग उनके दरबार मे माथा टेकते हैं। पहाड़ी पर बारिश से बहने वाले झरने ही पानी की स्त्रोत होते हैं। महाराष्ट्र विदर्भ सहित अनेक जिलों से श्रद्धालु भोलेशंकर के दर्शन, पूजन के लिए एकत्र होते है। दस दिनों तक 15  से 20 किमी दुर्गम पहाड़ी मार्ग की पैदल यात्रा पूरी कर भक्त नागद्वार गुफा पहुंचते हैं। मेले से पूर्व हर साल बारिश शुरू हो जाती है । हर बार की तरह इस बार भी मेला प्रशासन द्वारा मेले का आयोजन किया गया।, लेकिन इस बार ज्यादा खर्च ना करते हुए 90 फीसदी से ज्यादा की बचत की गई।

ऐसे कम हुआ खर्च 

मेले के लिए बजट करीब 64 लाख रु. रखा गया था, क्योंकि  पिछले पांच सालाें में मेले पर 50 लाख रुपए से अधिक खर्च आया। लेकिन इस बार मेला प्रशासन ने बड़ी सूझबूझ दिखाई और 64 लाख में होने वाले मेले को 10 लाख रु. में करा दिया। नाेडल अधिकारी व जिपं सीईओ आदित्य सिंह पूरे समय डटे रहे और एक-एक पाइंट की निगरानी खुद की। होटलों के बजाय सरकारी स्टाफ को भी भंडारे में ही भोजन करवाया गया। इस बार  70 हजार रुपए में श्रद्धालुओं की व्यवस्था हो गई, जबकी पिछली बार खर्च 22 लाख तक पहुंच गया।

वही इस बार चढ़ाेतरी की नीलामी 36 लाख रुपए, दुकानाें और स्टैंड की नीलामी से 6 लाख रुपए का लाभ हो गया है।साथ ही मेले में कर्मचारियों, अधिकारियाें ने पर्सनल सरकारी गाड़ियाें का उपयाेग न कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से ट्रेवल किया। इस तरह पिछले साल की अपेक्षा प्रशासन के करीब 3 लाख रुपए की बचत कराई। पिछले साल डीजल और ट्रेवल पर 3.80 लाख रुपए खर्च हुए थे। इस साल केवल 1.50 लाख में पूरा काम हाे गया।हालांकि इस बचत के चलते विवाद भी हो गया। मेले में कम खर्च होने से नाराज समिति प्रबंधक मनाेज रंगारे ने पद से इस्तीफा दे दिया। मनाेज रंगारे 2015 से मेला समिति में प्रबंधक थे।

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