सीएम शिवराज का बड़ा फैसला, वन्य-प्राणियों के हमले में मृत्यु पर राहत राशि दो गुना की

सीएम शिवराज का बड़ा फैसला, वन्य-प्राणियों के हमले में मृत्यु पर राहत राशि दो गुना की

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chauhan) ने आज उमरिया पहुंचकर स्व-सहायता समूह की बहनों के साथ बांधवगढ़ टाइगर नेशनल पार्क क्षेत्र (Bandhavgarh Tiger National Park)  ताला में अर्जुन का पौधा रोपा। उन्होंने यहां मीडिया से बात करते हुए कहा कि वन्य-प्राणियों के हमले में मृत्यु होने पर प्रति व्यक्ति राहत राशि 4 लाख से बढ़ा कर 8 लाख रुपये की जा रही है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वन्य-प्राणियों के संरक्षण के लिए जनता ने बलिदान दिया है। वनों और वन्य-प्राणियों को सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय निवासियों द्वारा दिए गए सहयोग के लिए मैं उनका आभारी हूँ। शहडोल संभाग और विंध्य क्षेत्र में टाइगर रिजर्वस भी हैं, वन्य-प्राणियों का संरक्षण प्रकृति में संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है। कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में कभी-कभी वन्य-प्राणियों के हमले के कारण कुछ भाई-बहन अपना जीवन बलिदान कर देते हैं। हमारा यह प्रयत्न रहेगा कि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ न हों।

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मीडिया से बात करने से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्व-सहायता समूह की बहनों के साथ बांधवगढ़ टाइगर नेशनल पार्क क्षेत्र ताला में अर्जुन का पौधा रोपा। मुख्यमंत्री के साथ कलेक्टर उमरिया कृष्ण देव त्रिपाठी, संचालक नेशनल पार्क  राजीव मिश्रा, पुलिस अधीक्षक प्रमोद सिन्हा, वन मण्डल अधिकारी और अन्य अधिकारियों ने भी अर्जुन, आँवला, इमली, अशोक, जामुन, सीताफल, गुलमोहर के पौधे लगाये।

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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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