‘एनपीए वसूली पर जोर दें सहकारी बैंक’, सरकार ने अफसरों को साल भर का दिया समय

भोपाल। प्रदेश में सहकारी बैंकों द्वारा किसानों केा अल्पकालीन कर्ज मुहैया कराया जाता है। जिसकी समय पर वसूली नहीं होने की वजह से कर्ज खाते एनपीए हो गए हैं। राज्य शासन ने सभी बैंकों को निर्देश दिए हैं कि साल भर के भीतर एनपीए खातों से राशि वसूल की जाए। विभागीय समीक्षा में सहकारिता मंत्री ने बैंकों से कहा कि व्यक्तिगत जमा पर भी ध्यान  दें। वित्तीय अनियमितताओं के प्रकरणों वसूली तथा एफआईआर दर्ज कराएं। 

ऋण वसूली को लेकर बैंक द्वारा कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। इस पर सहकारिता मंत्री द्वारा नाराजी व्यक्त करते हुए कहा कि यदि स्थिति नहीं सुधारी गई तो बोर्ड भंग करने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि ऋण वसूली की मासिक योजना बनाकर सघन कार्रवाई की जाए। जो लोग कार्य करना नहीं चाहते वे बैंकों से बाहर जाने की तैयारी कर लें।

इन जिलों में एनपीए ज्यादा 

बैतूल जिले में कालातीत ऋण की राशि रूपये 143 करोड़ है। आगामी 30 जून तक 100 करोड़ रूपये की वसूली कर ली जाए। रायसेन जिले में कालातीत ऋण राशि 148 करोड़ है, वहां के अधिकारी ने बताया कि आगामी जून तक 45 करोड़ की वसूली कर ली जाएगी। राजगढ़ में 183 करोड़ रूपये का कालातीत ऋण है।  आगामी जून तक कम से कम 75 करोड़ ऋण राशि की वसूली कर ली जाए। विदिशा जिले में 45 करोड़ कालातीत ऋण शेष है। होशंगाबाद में 292 करोड़ का कालातीत ऋण शेष है, जिसमें अधिकांश गैर कृषि ऋण है। कई कर्मचारियों के खिलाफ मामले भी चल रहे हैं। कई प्रकरणों में संबंधित सहायक/उप पंजीयक द्वारा स्टे भी दे दिया गया है। सीहोर जिले वर्ष 2016-17 में कालातीत ऋण 38 करोड़ था, जो वर्ष 2018-19 में बढ़कर 280 करोड़ रूपये हो गया।

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